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Bangladesh News: बांग्लादेश महिला परिषद की नेताओं ने मंगलवार को कहा कि हाल के दिनों में भीड़ की हिंसा (मॉब वायलेंस) देश में तेज़ी से बढ़ रही है, जो बेहद चिंता की बात है. परिषद का कहना है कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाली हिंसा भी लगातार बढ़ रही है. नेताओं ने बताया कि सोशल मीडिया और समाज में महिलाओं के खिलाफ नफ़रत फैलाने वाले प्रोपेगैंडा को तुरंत रोका जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर पड़ रहा है.
लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिषद ने सरकार से मांग की है कि बढ़ते मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाए और महिलाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत कदम उठाए जाएं. बांग्लादेश के बंगाली डेली प्रोथोम एलो ने बताया मंगलवार को महिलाओं के खिलाफ हिंसा की रोकथाम के लिए इंटरनेशनल डे के मौके पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, बांग्लादेश महिला परिषद की नेताओं ने बताया कि पिछले 10 महीनों (जनवरी-अक्टूबर 2025) में देश के मीडिया आउटलेट्स में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा की 2,468 रिपोर्टें पब्लिश हुई हैं.
न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से 713 महिलाएं और लड़कियां रेप, गैंग रेप और रेप के बाद सुसाइड का शिकार हुई हैं. इसके अलावा, महिलाओं और लड़कियों को कई तरह की हिंसा का सामना करना पड़ा है, जिसमें मर्डर, घरेलू हिंसा, दहेज, बाल विवाह, सेक्सुअल असॉल्ट, किडनैपिंग और साइबर हिंसा शामिल हैं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई सवालों के जवाब में बांग्लादेश महिला परिषद की प्रेसिडेंट फवज़िया मोस्लेम ने कहा, "कानून को सही तरीके से लागू करना, पुरुष-प्रधान सोच और सामाजिक संस्थाओं में बदलाव को टॉर्चर के खिलाफ़ भूमिका निभानी चाहिए. औरतों से नफ़रत करने वाले प्रोपेगैंडा को सख्ती से दबाना होगा. मीडिया में भी महिलाओं पर टॉर्चर की घटनाएं हुई हैं. यहां भी एक स्टैंडर्ड तय करने की ज़रूरत है."
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बांग्लादेश महिला परिषद की जॉइंट सेक्रेटरी मसुदा रेहाना बेगम ने कहा, "हाल के दिनों में भीड़ की हिंसा चिंता का विषय बन गई है. यह बहुत ज़्यादा बढ़ गई है. पांच साल के डेटा का एनालिसिस करने से पता चलता है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ़ हिंसा की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं." ऑर्गनाइज़ेशन की एक और जॉइंट सेक्रेटरी, सीमा मोस्लेम ने कहा कि जब तक महिलाओं को फैसले लेने में ताकत नहीं मिलेगी, तब तक महिलाओं का असली एम्पावरमेंट नहीं होगा.
प्रोथोम एलो की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बांग्लादेश की नेशनल पार्लियामेंट में रिज़र्व सीटों के लिए सीधे चुनाव की भी मांग की. बांग्लादेश ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स (BBS) के इस साल पब्लिश हुए एक सर्वे से पता चला है कि बांग्लादेश में 76 परसेंट महिलाओं को अपनी ज़िंदगी में कभी न कभी, खासकर अपने पतियों के हाथों, शारीरिक, मानसिक, सेक्शुअल और फाइनेंशियल शोषण या कंट्रोलिंग बिहेवियर का सामना करना पड़ा है. मोहम्मद यूनुस की लीडरशिप वाली अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे देश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति सामने आई है.