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Bangladesh News Today: जुलाई चार्टर पर कैंपेन को लेकर उत्पन्न तनाव के मद्देनजर, बांग्लादेश में प्रदर्शनकारियों की एक कम्यूनिटी, जिन्हें 'जुलाई जोधा संसद' (जुलाई योद्धा) नाम दिया गया है, उन्होने रविवार को देश भर में सभी नेशनल हाईवे को बंद करने का ऐलान किया है. और वे अपनी तीन मांगों पर जोर दे रहे हैं, तीन मांगों में जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों को स्टेट के ज़रिए मान्यता प्रदान करना, ज़ख़्मियों को 'जुलाई योद्धा' के तौर पर मान्यता देना, मृतकों के परिवारों के पुनर्वास के लिए एक विशिष्ट रोडमैप और ज़ख़्मियों को कानूनी मदद प्रदान करने जैसी मांगें कर रहे है.
नेशनल सिटीजन पार्टी और चार वामपंथी दलों सहित कई सियासी दलों के बहिष्कार के बीच, अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस, राष्ट्रीय सहमति आयोग के मेंबर और अलग अलग सियासी दलों के नेताओं ने शुक्रवार को जुलाई चार्टर पर हस्ताक्षर किए.
ढाका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, 'जुलाई जोधा संसद' समूह के मेन ऑर्गनाइज़र मसूद राणा ने संसद परिसर के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों के बाद शुक्रवार शाम को नाकेबंदी की घोषणा की थी, जहां उन्होंने जुलाई चार्टर पर हस्ताक्षर के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था.
बांग्लादेशी दैनिक 'जुगांतोर' ने मसूद के हवाले से कहा, "हम पर हमला किया गया है, हम पर हुए हमले का विरोध करने और अपनी तीन सूत्री मांगों को पूरा करने के लिए, रविवार को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक हर जिले और शहर के राजमार्गों पर नाकाबंदी की जाएगी.
मसूद राणा ने पुलिस पर उनके "शांतिपूर्ण धरने" पर हमला करने का इल्ज़ाम लगाते हुए कहा, "हम संसद द्वार के सामने पुर अम्न तरीके से अपना प्रदर्शन कर रहे थे, प्रशासनिक अधिकारियों ने हमसे बात की थी, और हमने उन्हें यकीन दिलाया था, कि हमारा प्रोग्राम सुबह 10 बजे तक बिना किसी अव्यवस्था के जारी रहेगा, लेकिन कोई बातचीत या समाधान शुरू करने के बजाय, उन्होंने अचानक हम पर हमला कर दिया था.
शुक्रवार दोपहर, जुलाई चार्टर हस्ताक्षर प्रोग्राम से कुछ घंटे पहले संसद परिसर में कानून प्रवर्तन अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं. जिसमें कई लोग बुरी तरह ज़ख़्मी हो गए थे.
इस मामले की पुष्टि करते हुए, ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) पुलिस चौकी के इंचार्ज इंस्पेक्टर फारुक ने कहा कि, जुलाई विरोध प्रदर्शनों में शामिल 36 लोग ज़ख़्मी हुए थे, जिन्हें ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जैसे ही मुज़ाहिरीन ने रैली निकालने और अपनी मांगों पर जोर देने की कोशिश की, सेना और पुलिस ने उन्हें संसद द्वार पर रोक दिया, जिससे हिंसा भड़क उठी.पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में लाठीचार्ज किया. और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए तीन राउंड साउंड ग्रेनेड दागे.
इसके बाद, प्रदर्शनकारियों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए एक कार और एक बस सहित पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की, और जुलाई चार्टर हस्ताक्षर समारोह के लिए संसद भवन के बाहर स्थापित अस्थायी स्वागत कक्ष, नियंत्रण कक्ष और फर्नीचर में आग लगा दी.
मुज़ाहिरीन ने अंतरिम सरकार को वॉर्निंग देते हुए कहा, "अगर हमें फिर से अपना खून बहाना पड़ा, तो दूसरा प्रशासन भी नहीं बचेगा." उन्होंने बताया कि कैसे पिछले साल हुए विरोध प्रदर्शनों ने पिछली अवामी लीग सरकार को गिरा दिया था और मुहम्मद यूनुस के निगरानी वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने का रास्ता साफ कर दिया था.
पिछले साल हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के अगुवाई वाली अवामी लीग की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को गिरा दिया गया था जिसके बाद से ही बांग्लादेश में सियासी संकट जारी है.