)
European Union sanctions on Israel: गाजा में पिछले 23 महीनों से इजरायल नरसंहार कर रहा है. इस नरसंहार को रोकने के लिए दुनियाभर के लीडर नाकाम हो गए हैं. इस बीच, इजरायल ने ऐलान किया है कि वह पूरे गाजा पट्टी पर कब्जा कर लेगा और नेतन्याहू ने IDF को गाजा पर हमले तेज करने का आदेश दिया है. इस बीच इजरायल ने कतर पर हमला करके मिडिल ईस्ट में माहौल गर्म कर दिया है. कतर पर इजरायली हमले के बाद अरब देशों ने दुनिया भर में हल्ला मचा दिया है कि वे इजरायल से बदला लेंगे, लेकिन अभी तक मुस्लिम देशों ने इजरायल के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. वहीं, जो काम मुस्लिम देश अब तक नहीं कर पाए हैं, वह यूरोपीय संघ (EU) इजरायल के खिलाफ करने जा रहा है.
यूरोपीय संघ के मुख्य कार्यकारी निकाय यूरोपीय आयोग ने इजरायल के नरसंहार को रोकने के लिए कड़े प्रस्ताव का ऐलान किया है. आयोग ने आज (17 सितम्बर) यूरोपीय संघ और इजराइल के बीच एसोसिएशन एग्रीमेंट की कुछ व्यापार शर्तों को सस्पेंड करने का प्रस्ताव रखा है. इस प्रस्ताव के तहत इजरायल के खिलाफ उच्च टैरिफ लगाए जाएंगे और इजरायली मंत्रियों और हमास के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. यूरोपीय संघ और इजरायल के बीच एसोसिएशन एग्रीमेंट की वजह से इजरायल को यूरोपीय बाज़ार में ज़ीरो टैरिफ की सुविधा मिली हुई है. अब इसे समाप्त करने पर विचार किया जा रहा है.
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कॅलस ने सदस्य देशों से अपील की कि कुछ इजरायली सामान पर टैरिफ बढ़ाया जाए और 10 हमास नेताओं, हिंसक इजरायली बाशिंदों और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दो कट्टर मंत्रियों के खिलाफ एक्शन लेना शामिल हैं. इस समझौते के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बैन-गवीर और वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच पर भी बैन लगाया जाएगा. यूरोपीय आयोग ने कहा कि वह इजरायल को दी जाने वाली द्विपक्षीय आर्थिक सहायता को भी रोक रहा है.
आयोग ने कहा कि यह कदम इसलिए सुझाया गया है क्योंकि एसोसिएशन एग्रीमेंट के आर्टिकल 2 के तहत इजरायल ने मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों के अहम तत्वों का उल्लंघन किया है. आयोग के मुताबिक, गाजा में मानवीय स्थिति का तेजी से बिगड़ना, मानवीय सहायता पर रोक, सैन्य कार्रवाई में बढ़ोतरी और वेस्ट बैंक के E-1 इलाके में बस्ती योजनाओं को आगे बढ़ाना, ये सब दो-राष्ट्र समाधान को कमजोर करते हैं और समझौते के उल्लंघन की श्रेणी में आते हैं.
वहीं, ज़्यादातर अरब देशों ने अभी तक इजरायल के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी हालत में इजरायल को नहीं छोड़ेगा. कतर पर हमले के बाद ऐसा लग रहा था कि सभी अरब देश एकजुट होकर इजरायल का बहिष्कार करेंगे. लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है. कई अरब देश अभी भी इज़रायल के साथ व्यापार कर रहे हैं. दरअसल, अभी तक किसी भी अरब देश ने इजरायल के साथ सभी तरह के व्यापार बंद करने की घोषणा नहीं की है. इजरायल और अरब देशों के बीच अप्रत्यक्ष व्यापार तीसरे पक्षों, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका और कई यूरोपीय देश शामिल हैं, उनके माध्यम से जारी है.