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Pakistan on Gaza: पाकिस्तान की 'धोखे' की पुरानी रणनीति अब यूनाइटेड स्टेट्स में कम असरदार साबित हो सकती है. एक हालिया रिपोर्ट चेतावनी देती है कि बदलते अमेरिका में जहां नीतियां ज़्यादा लेन-देन वाली और लीडरशिप-केंद्रित हो गई हैं, पाकिस्तान के तरीके का अब सीमित असर हो सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के आर्मी चीफ, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ट्रंप के हाई-रिस्क गाजा स्टेबिलाइज़ेशन प्रोजेक्ट के तहत सैनिक देने की इच्छा जताई है. हालांकि, अगर ट्रंप को लगता है कि मुनीर जमीन पर कुछ किए बिना सिर्फ़ वादे कर रहे हैं, जैसा कि पहले भी हुआ है, तो पाकिस्तान की गारंटी जल्दी कमज़ोर पड़ सकती है.
UAE के मीडिया आउटलेट अल अरबिया पोस्ट की रिपोर्ट है कि आसिम मुनीर का पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली मिलिट्री शासकों में से एक के तौर पर उदय ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप गाजा के लिए एक इंटरनेशनल स्टेबिलाइज़ेशन फोर्स (ISF) की योजना पर काम कर रहे हैं. इस संभावित डील में पाकिस्तान अमेरिकी आर्थिक मदद, राजनीतिक सुरक्षा और घरेलू कामों पर आंख बंद करने के बदले में सैनिक देगा.
रिपोर्ट का दावा है कि यह "लेन-देन वाला समझौता" खास तौर पर इमरान खान और उनकी PTI पार्टी के खिलाफ़ की गई कार्रवाई पर अमेरिका की चुप्पी से जुड़ा है. हालांकि, बढ़ते दबाव के साथ, पाकिस्तान का पुराना तरीका (ज़्यादा वादे और कम काम) फिर से सामने आ रहा है. आरोप है कि मुनीर ISF से पीछे हट रहे हैं, जबकि साथ ही ज़्यादा से ज़्यादा भू-राजनीतिक फ़ायदे उठाने की कोशिश कर रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, आज आसिम मुनीर की ताकत तीन स्तंभों पर टिकी है. सेना और खुफिया तंत्र पर मज़बूत नियंत्रण, इस्लामाबाद में कमज़ोर नागरिक सरकार और इमरान खान की राजनीतिक चुनौती को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर करना. 9 मई, 2023 की घटनाओं के बाद PTI पर कार्रवाई, सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं पर नियंत्रण और फील्ड मार्शल का पद उन्हें देश का असल शासक बनाता है, लेकिन साथ ही आर्थिक संकट, राजनीतिक दमन और रणनीतिक विफलताओं के लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार भी बनाता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि बाहरी समर्थन अब मुनीर के लिए सिर्फ़ एक विकल्प नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक अस्तित्व के लिए एक ज़रूरत बन गया है. इसी वजह से वह वाशिंगटन से तीन मुख्य आश्वासन मांग रहे हैं. पहला, उनके कार्यकाल और असाधारण शक्तियों को बढ़ाने के लिए मौन समर्थन. दूसरा, पाकिस्तान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए निवेश और आर्थिक राहत, जिसका उदाहरण US-पाकिस्तान खनिज और ऊर्जा समझौते हैं. तीसरा, इमरान खान के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई, मीडिया ब्लैकआउट और राजनीतिक अलगाव पर अमेरिका की चुप्पी.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर पाकिस्तान टालमटोल करता रहा, तो अमेरिका के पास सिर्फ़ दो ही विकल्प बचेंगे या तो कमज़ोर और सीमित समर्थन के साथ ISF (इंटरनेशनल सिक्योरिटी फ़ोर्स) के साथ आगे बढ़ना, या पाकिस्तान पर सीधा दबाव डालना. दोनों ही विकल्प महंगे और जोखिम भरे हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गाज़ा पर रियायतों के बदले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का यह "फॉस्टियन सौदा" किसी भी समय टूट सकता है, जिससे असीम मुनीर घरेलू स्तर पर नाज़ुक स्थिति में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अविश्वसनीय स्थिति में आ जाएंगे.
इनपुट-IANS