Advertisement
trendingNow,recommendedStories0/zeesalaam/zeesalaam2721299
Zee SalaamMuslim WorldGaza: 2007 से अभी तक किया होगा फिलिस्तीन के लिए पोस्ट, तो होगा एक्शन; ट्रंप का बड़ा प्लान

Gaza: 2007 से अभी तक किया होगा फिलिस्तीन के लिए पोस्ट, तो होगा एक्शन; ट्रंप का बड़ा प्लान

Gaza News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लोगों को देश से डिपोर्ट करने का बड़ा प्लान बताया है. वह 2007 से लेकर अभी तक सोशल मीडिया की जांच करने वाले हैं. पूरी खबर पढ़ें.

Gaza: 2007 से अभी तक किया होगा फिलिस्तीन के लिए पोस्ट, तो होगा एक्शन; ट्रंप का बड़ा प्लान

Gaza News: ट्रम्प सरकार ने गुरुवार को उन सभी अमेरिकी वीजा आवेदकों के लिए सोशल मीडिया जांच का आदेश दिया है, जो 1 जनवरी 2007 को या उसके बाद गाजा पट्टी गए हैं. यह आदेश रॉयटर्स के जरिए देखे गए फॉरेन डिपार्टमेंट के एक आंतरिक केबल से पता चला है. यह विदेशी यात्रियों की जांच को सख्त करने की डायरेक्शन में उठाया गया नया कदम है.

ट्रंप सरकार का बड़ा आदेश

केबल में कहा गया है कि उन सभी लोगों की जांच हो जो गाजा में किसी भी तरह रहे हों. इसमें एनजीओ के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ ऐसे व्यक्तियों को भी शामिल किया जाएगा जो आधिकारिक या राजनयिक क्षमता में किसी भी तरह से फिलिस्तीन गए हों. अगर सोशल मीडिया नतीजों के रिव्यू में सिक्योरिटी मामलों से संबंधित कोई भी जानकारी सामने आती है तो एक SAO पेश किया जाना चाहिए.

पहले हो चुके हैं सैकड़ों वीज़ा रद्द

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने देशभर में सैकड़ों वीज़ा रद्द कर दिए हैं, जिसमें कुछ वैध स्थायी निवासियों (लॉफुल परमानेंट रेज़िडेंट्स) का स्टेटस भी शामिल है. यह कार्रवाई 1952 के एक कानून के तहत की गई है, जो विदेश मंत्री को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी ऐसे अप्रवासी को देश से निकाल सकता है, जिसकी मौजूदगी अमेरिकी विदेश नीति के लिए हानिकारक मानी जाए.

Add Zee News as a Preferred Source

फिलिस्तीन के लिए बोलना मतलब अमेरिका के लिए खतरा

17 अप्रैल को एक सरकारी दस्तावेज (केबल) पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दस्तखत किए थे. उन्होंने मार्च के आखिर में कहा था कि वह अब तक 300 से ज्यादा वीज़ा रद्द कर चुके हैं. ट्रंप सरकार के अधिकारियों का कहना है कि जो स्टूडेंट वीज़ा धारक फिलीस्तीन के समर्थन में बोलते हैं या गाजा में इज़राइल की कार्रवाई की आलोचना करते हैं, उन्हें देश की विदेश नीति के लिए खतरा माना जा रहा है और इसी कारण उनके वीज़ा रद्द किए जा सकते हैं.

बोलने की आज़ादी पर हमला

ट्रंप सरकार के आलोचकों ने इस कार्रवाई को अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन (First Amendment) के तहत बोलने की आज़ादी (फ्री स्पीच) पर हमला बताया है. अमेरिकी संविधान देश में मौजूद हर व्यक्ति को, चाहे उनकी इमिग्रेशन स्थिति कुछ भी हो, अभिव्यक्ति की आज़ादी देता है. फिर भी, कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें उन छात्रों के वीज़ा रद्द किए गए हैं, जो गाजा जंग के खिलाफ बोलते हैं या इज़राइल की आलोचना करते हैं.

About the Author
author img
Sami Siddiqui

समी सिद्दीकी उप्र के शामली जिले के निवासी हैं, और 6 से दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे हैं. राजनीति, मिडिल ईस्ट की समस्या, देश में मुस्लिम माइनॉरिटी के मसले उनके प्रिय विषय हैं. इन से जुड़ी सटीक, सत्य ...और पढ़ें

TAGS

Trending news