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Zee SalaamMuslim WorldGaza Ramadan: जंग के बीच दूसरा रमजान, टूटी इबादतगाहों के बीच रोज़ा रखने के लिए तैयार हैं फिलिस्तीनी

Gaza Ramadan: जंग के बीच दूसरा रमजान, टूटी इबादतगाहों के बीच रोज़ा रखने के लिए तैयार हैं फिलिस्तीनी

रमजान दस्तक देने वाला है और रोजे इस्लाम के अहम पिलर्स में से एक है. टैंट्स में रह रहे फिलिस्तीनियों का जंग के बीच यह दूसरा रमजान है. हालांकि, सीजफायर लागू है.

Gaza Ramadan: जंग के बीच दूसरा रमजान, टूटी इबादतगाहों के बीच रोज़ा रखने के लिए तैयार हैं फिलिस्तीनी

Gaza Ramadan: रमजान दस्तक देने वाला है और रोजे इस्लाम के अहम पिलर्स में से एक है. टैंट्स में रह रहे फिलिस्तीनियों का जंग के बीच यह दूसरा रमजान है. हालांकि, सीजफायर लागू है. लेकिन, रहने के लिए जगह और पानी नहीं है और इबादत के लिए मस्जिदें नहीं है. 

रमजान के लिए तैयार हैं गाजा के लोग

गाजा में, जो इजरायल के 15 महीने के नरसंहारकारी बमबारी ऑपरेशन से बुरी तरह जख्मी है वह रोजा रखने से पीछे नहीं हट रहे हैं. निवासियों ने सड़कों और घरों को लालटेन, बैनर और रंग-बिरंगे झंडों से सजाकर रमजान के पाक महीने की तैयारी शुरू कर दी है.

हाथ से बने सामान का इस्तेमाल

इजरायल के युद्ध से हुई बड़ी तबाही के बावजूद, पट्टी के फिलिस्तीनी आस्था और लचीलेपन के प्रतीकों के साथ अपनी कम्यूनिटी को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. हाथ से बना हुआ सजावट का सामान, चमकते आधे चांद और रंगबिरंगी रोशनियां अब इमारतों के बीच लटक रही हैं, जो इस हफ्ते मुस्लिम महीने रमजान की शुरुआत से पहले एकता और उम्मीद की भावना ला रही है.

सजावट का सामान

कई लोगों के लिए, ये तैयारियां मुश्किलों का सामना करते हुए हिम्मत और रुहानी ताकत की याद दिलाती हैं. ऐसा लगता है कि परिवार पाक महीने के एहतराम को बनाए रखने पूरी तरह से मुत्तहिद हैं. हालांकि, काफी लोग ऐसे हैं जिनके पास खाना खरीदने और सजावट का सामान खरीदने के पैसे नहीं हैं और वह इसके लिए काम कर रहे हैं.

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दुकानदार होसम अल-अजूज ने कहा कि पिछले सालों में रमजान का वक्त सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद होता था, लेकिन इस साल चीज़ें काफ़ी धीमी हो गई हैं. गाजा में अपनी दुकान के बाहर लालटेन दिखाते हुए अल-अजूज कहते हैं: "लोग अभी भी आहत हैं, बाज़ारों में ज़्यादा हलचल नहीं है."

पैसे की कमी के अलावा, लोग बिजली सहित सुविधाओं के बिना भी सामान जमा कर रहे हैं. अल-अजूज कहते हैं, "लालटेन को बिजली की ज़रूरत होती है, इसलिए हम उन्हें सिर्फ़ सजावट के तौर पर बेच रहे हैं."

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Sami Siddiqui

समी सिद्दीकी उप्र के शामली जिले के निवासी हैं, और 6 से दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे हैं. राजनीति, मिडिल ईस्ट की समस्या, देश में मुस्लिम माइनॉरिटी के मसले उनके प्रिय विषय हैं. इन से जुड़ी सटीक, सत्य ...और पढ़ें

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