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इज़रायली सैनिकों को लेबनान से बाहर खदेड़ देगा हिजबुल्लाह, नईम कासिम ने खाई कसम

Hezbollah on Israel: लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ़ औन ने नेतन्याहू से बार-बार अपील की है कि वे लेबनान से अपनी सेना वापस बुला लें, लेकिन इजरायली फौज अभी भी लेबनान के अंदर मौजूद है. 

इज़रायली सैनिकों को लेबनान से बाहर खदेड़ देगा हिजबुल्लाह, नईम कासिम ने खाई कसम

Hezbollah on Israel: हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जंग के बाद से नेतन्याहू के आदेश पर इजरायली सेना लेबनान में मौजूद है. लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ़ औन ने नेतन्याहू से बार-बार अपील की है कि वे लेबनान से अपनी सेना वापस बुला लें, लेकिन इजरायली फौज अभी भी लेबनान के अंदर मौजूद है. इस बीच हिज़्बुल्लाह ने इसराइली सेना को लेबनान से बाहर निकालने की कसम खाई है.

हिजबुल्लाह के महासचिव नईम कासिम ने फिर से तस्दीक की कि समूह दक्षिणी लेबनान में किसी भी इजरायली मौजूदगी की अनुमति नहीं देगा, उन्होंने हिजबुल्लाह की स्थायी ताकत और लेबनान की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया. अल-मनार टीवी के साथ एक टेलीविज़न साक्षात्कार में, कासिम ने खुलासा किया कि युद्धविराम समझौते के दौरान, हिजबुल्लाह ने ऑपरेशन बंद कर दिए, लेकिन पूरी सैन्य तत्परता बनाए रखी.

सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है इजरायल
उन्होंने कहा, "पिछले 60 दिनों में, इजरायल ने कई उल्लंघन किए हैं. समझौते में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इजरायल को लिटानी नदी से पीछे हटना चाहिए." घरेलू मामलों पर, कासिम ने राष्ट्रीय स्थिरता और शासन के लिए हिजबुल्लाह के समर्पण को दोहराया, आंतरिक सुरक्षा पर सुरक्षा बलों के विशेष अधिकार का समर्थन किया. हालांकि, उन्होंने कहा कि इजरायल का सामना करने के लिए हिजबुल्लाह के हथियार महत्वपूर्ण हैं.

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लेबनान के पुनर्निर्माण पर क्या बोले हिजबुल्लाह नेता
उन्होंने ऐलान किया है कि "इजरायल एक अस्तित्वगत खतरा है, और प्रतिरोध लेबनान का अधिकार है." कासिम ने लेबनान के पुनर्निर्माण पर भी बात की, उन्होंने पुष्टि की कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों का पुनर्निर्माण राज्य की जिम्मेदारी है. उन्होंने राजनीतिक और सैन्य मामलों में हिजबुल्लाह की निरंतर भूमिका पर जोर दिया, उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक इजरायली खतरे बने रहेंगे, तब तक "प्रतिरोध" जारी रहेगा.

कब हुआ था सीजफायर समझौता
27 नवंबर, 2024 को हुए एक युद्धविराम समझौते ने हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच एक साल से अधिक समय से चली आ रही शत्रुता को काफी हद तक रोक दिया, जिसमें दो महीने का पूर्ण पैमाने पर युद्ध भी शामिल था, जिसमें इजरायली जमीनी सैनिकों की तैनाती देखी गई थी. समझौते में 60 दिनों के भीतर दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी अनिवार्य थी. हालांकि, हिजबुल्लाह से चल रहे खतरों का हवाला देते हुए, इजरायल ने सीमा पर पांच रणनीतिक स्थानों पर अपनी उपस्थिति बनाए रखी है.

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Tauseef Alam

तौसीफ आलम पिछले चार सालों से पत्रकारिता के पेशे में हैं. उन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. Amar Ujala,Times Now...और पढ़ें

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