US Iran Tension: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची चीन दौरे पर बीजिंग पहुंचे हैं, जहां वे द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा करेंगे. यह दौरा अमेरिका-ईरान तनाव और ट्रंप-शी जिनपिंग बैठक से पहले बेहद अहम माना जा रहा है.
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Iran China Meeting: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची बुधवार सुबह एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे हैं. यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब इस क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव अपने चरम पर है. बीजिंग पहुंचने के बाद, अराघची चीन के विदेश मंत्री से मुलाक़ात करने वाले हैं. इस मुलाकात के दौरान, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी चर्चा होगी. ईरानी मीडिया के अनुसार, इस यात्रा को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ईरान मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल के बीच अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ समन्वय बढ़ाना चाहता है.
समाचार एजेंसी AP के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध के बाद ईरानी उप विदेश मंत्री की चीन की यह पहली यात्रा है. यह साफ दर्शाता है कि ईरान संकट के इस दौर में चीन के साथ अपने संबंधों को और मज़बूत करना चाहता है. चीन पहले से ही ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल खरीदना जारी रखे हुए है. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी 14 और 15 मई को चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं, जहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे. इस कड़ी में अराघची की यात्रा और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यह अमेरिका, चीन और ईरान से जुड़े नए भू-राजनीतिक समीकरणों के उभरने का संकेत हो सकती है.
चीन से मांगी मदद
अमेरिका भी इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए है. अमेरिकी सीनेटर मार्को रूबियो ने चीन से आग्रह किया है कि वह ईरान पर दबाव डाले ताकि वह Strait of Hormuz पर अपना नियंत्रण कम करे. रूबियो ने कहा कि ईरान की मौजूदा रणनीति उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर सकती है. होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे होकर वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है. इसके अलावा इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने का वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाज़ारों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है.
इजरायल में भारी तबाही
गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के कई शहरों पर बमबारी की. इस बमबारी के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई शहीद हो गए. उनकी शहादत के बाद ईरान ने इज़राइल के साथ-साथ मध्य-पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया. ईरान के इन हमलों में इजरायल और अमेरिका दोनों ही जगहों पर भारी तबाही हुई है.