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Iran Israel War: ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब सिर्फ दो मुल्कों की लड़ाई नहीं रही. ये लड़ाई धीरे-धीरे एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां से मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति, कूटनीति और शक्ति संतुलन का भविष्य तय होने वाला है. जिस तरह से दोनों तरफ से हमलों का सिलसिला जारी है और दुनिया के ताकतवर मु्ल्क इसमें कूद चुके हैं, उसने इस जंग को ‘मिनी वर्ल्ड वॉर’ की शक्ल दे दी है.
जहां एक तरफ इजरायल के साथ अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस समेत जी-7 देशों का सीधा समर्थन है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के पीछे रूस, सऊदी अरब, कतर, चीन, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे मुल्क खड़े हो चुके हैं. इस संघर्ष का फैसला सिर्फ इजरायल या ईरान की हार-जीत से नहीं होगा, बल्कि यह लड़ाई अमेरिका बनाम चीन-रूस गुट के बीच वर्चस्व की भी परीक्षा है.
क्यों बदला मिडिल ईस्ट का समीकरण?
मिडिल ईस्ट दशकों से राजनीतिक, धार्मिक और ऊर्जा (तेल और गैस) के खेल का केंद्र रहा है. पहले अमेरिका और पश्चिमी देशों का यहां एकतरफा दबदबा था लेकिन पिछले एक दशक में चीन और रूस ने अपने आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव को तेज़ी से बढ़ाया है. चीन ने अपने ‘Belt and Road Initiative’ के ज़रिए अरब देशों में निवेश बढ़ाया और रूस ने सीरिया में हस्तक्षेप कर अपनी सैन्य मौजूदगी पक्की कर ली. अब इजरायल-ईरान जंग में दोनों ध्रुव आमने-सामने हैं. चीन और रूस की दिलचस्पी सिर्फ ईरान की मदद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने के मौके के रूप में इसे देख रहे हैं.
क्या होगा मिडिल ईस्ट का भविष्य?
इस युद्ध का नतीजा जो भी हो, मिडिल ईस्ट का राजनीतिक नक्शा बदलना तय है. अगर इजरायल जीतता है तो अमेरिका और पश्चिमी देशों का दबदबा एक बार फिर मध्य पूर्व पर कायम हो जाएगा लेकिन अगर रूस और चीन का सहयोग ईरान को शक्तिशाली बनाता है तो यहां एक नया शक्ति संतुलन उभरेगा, जिसमें सऊदी अरब, कतर जैसे देश अमेरिका से दूरी बनाकर चीन और रूस के साथ खड़े हो सकते हैं. इसका सीधा असर तेल-गैस बाजार, हथियारों की होड़ और धार्मिक ध्रुवीकरण पर पड़ेगा.
जॉर्डन और मिस्र का क्या होगा रुख?
इस युद्ध के बाद मध्य पूर्व में 'नए दोस्त और नए दुश्मन' बनेंगे. डोनाल्ड ट्रंप का देश अमेरिका के पारंपरिक सहयोगियों के बीच भी कड़वाहट पैदा कर सकता है, जैसा कि हाल के दिनों में सऊदी अरब और अमेरिका के बीच तेल नीति को लेकर देखा गया था. इस युद्ध के बाद जॉर्डन और मिस्र जैसे देश इजरायल से दूर हो सकते हैं. क्योंकि अभी तक मिस्र और जॉर्डन का झुकाव इजरायल की तरफ है. जॉर्डन ईरान की मिसाइलों को मार गिरा रहा है.
मध्य पूर्व का कौन बनेगा बाजीगर?
दरअसल, यह युद्ध ईरान और इजरायल के बीच सिर्फ मिसाइलों और ड्रोन को लेकर नहीं है. पर्दे के पीछे अमेरिका और चीन-रूस के बीच वर्चस्व की जंग चल रही है. सवाल यह नहीं है कि कौन जीतेगा, सवाल यह है कि इस युद्ध के बाद दुनिया में 'शक्ति का केंद्र' कौन बनेगा. यही वजह है कि मध्य पूर्व के हर देश की नज़र इस युद्ध पर है, क्योंकि इसके बाद ही तय होगा कि अगला दशक अमेरिका का होगा या चीन-रूस गठबंधन का.