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Iran Israel War: इजराइल और ईरान ने एक दूसरे पर हमलों पर रफ्तार तेज कर दी है. इस युद्ध के पांचवे दिन भी इजराइल ने ईरान में कई जगहों पर हवाई हमले किए, जिसका ईरान ने भी इजराइल पर मिसाइलों से हमला कर मुहंतोड़ जवाब दिया. इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कथित परमाणु हथियारों के दावे और फिर ईरान पर हमला करने बाद दुनिया दो धड़ों में बंट गई है और इसका असर दूसरे मुल्कों पर भी पड़ रहा है.
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ऐलान ने न सिर्फ ईरान को बल्कि दुनिया के सभी शांत पसंद मुल्कों को सकते में डाल दिया है. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने सभी को तत्काल ईरान की राजधानी तेहरान को खाली करने की चेतावनी दी है. यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब इजराइल पहले ही ईरान के नागरिक ठिकानों पर हमला करने की धमकी दे चुका है.
ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरान को उस परमाणु समझौते पर साइन कर लेने चाहिए थे, जैसा उन्होंने कहा था. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ' पर पोस्ट एक संदेश में कहा, "ईरान को उस डील पर साइन कर लेने चाहिए थे, जिस पर मैंने उनसे साइन करने के लिए कहा था. यह बहुत शर्म की बात है और मानव जीवन की बर्बादी है." ट्रंप ने अपनी पुरानी बात दोहराते हुए कहा, "ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते. मैंने यह बात बार-बार कही थी. सभी को तत्काल तेहरान खाली कर देना चाहिए."
हिंदुस्तान में छपी खबर के मुताबिक, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि इजरायल के जरिये ईरान पर किए गए हमलों ने उसके परमाणु कार्यक्रम को बहुत लंबे समय के लिए पीछे धकेल दिया है. अपने जिद्दी रवैये के लिए मशहूर नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजरायल का मकसद ईरान की सरकार को गिराना नहीं है, लेकिन अगर हमलों की वजह से ऐसा होता है तो उन्हें कोई हैरानी नहीं होगी, क्योंकि नेतन्याहू के मुताबिक ईरान का शासन बहुत कमजोर है."
अपने अड़ियल और जिद्दी रवैये के वजह से बेंजामिन नेतन्याहू को अपने देश इजराइल में ही भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. नेतन्याहू ईरान में साल 1992 से दावा कर रहे हैं कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है और इससे दुनिया को खतरा है. मुस्लिम मुखालिफ रवैये के लिए मशहूर बेंजामिन नेतन्याहू ने पूर्ववर्ती सद्दाम हुसैन की अगुवाई वाली ईराक सरकार पर खतरनाक हथियार बनाने के आरोप लगाए थे. हालांकि, नेतन्याहू और ट्रंप के दावों के विपरीत दुनिया जी-7 देशों के समूह में से ज्यादातर ने ईरान-इजराइल में तत्काल युद्धविराम की पुरजोर वकालत की है.