Iran US Ceasefire: ईरान-अमेरिका सीजफायर के बावजूद कुवैत के ड्रोन हमले के आरोप और ट्रंप के बयान से तनाव बढ़ गया है. होर्मुज़ पर ईरान की पकड़ और इजरायल-लेबनान वार्ता के बीच मिडिल ईस्ट की स्थिति और नाजुक हो गई है.
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Iran US Ceasefire: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो हफ्ते का सीजफायर लगातार निगरानी में है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सीजफायर की प्रभावशीलता पर संदेह जताते हुए कहा कि ईरान अभी भी होर्मुज पर अपना दबदबा बनाए हुए है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो रही है. इस बीच कुवैत ने इल्जाम लगाया है कि सीजफायर के बावजूद ईरान और उसके सहयोगियों ने उस पर ड्रोन हमले किए हैं. इन दावों को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने नकार दिया है.
वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ सीधी बातचीत को मंजूरी देकर शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता का संकेत दिया है. हालांकि, लेबनान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है. यह पहल ऐसे समय में आई है जब इजरायल ने हाल ही में बेरूत पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे, जिसके के बाद 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.
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अभी भी कई बड़े सवालों के जवाब नहीं मिले हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके पास मौजूद यूरेनियम का क्या होगा. साथ ही यह भी साफ नहीं है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही कब सामान्य होगी. इसके अलावा, ईरान की सैन्य ताकत और उसके साथ जुड़े संगठनों की आगे क्या भूमिका रहेगी, इसे लेकर भी अभी अनिश्चितता बनी हुई है. अमेरिका और ईरान के बीच इस संकट को हल करने के लिए, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होने वाली है. व्हाइट हाउस के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस इन वार्ताओं के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे.
तेल सप्लाई को लेकर चिंता
तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है, इसलिए जापान ने अपने स्टॉक से और 20 दिन का तेल बाजार में देने का फैसला किया है. इससे पहले वह 50 दिन का तेल भी जारी कर चुका है. जापान अब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए नए रास्ते और सप्लायर ढूंढ रहा है. वहीं, पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में होने वाली अहम बातचीत को देखते हुए विदेश से आने वाले लोगों के लिए “वीज़ा ऑन अराइवल” की सुविधा शुरू करने का फैसला किया है, ताकि मीडिया और प्रतिनिधि आसानी से आ सकें.