Hormuz Strait Crisis: इराक कच्चे तेल पर 33 डॉलर तक की छूट दे रहा है, लेकिन सप्लाई के लिए होर्मुज स्ट्रेट से गुजरना अनिवार्य है. ईरान और अमेरिका तनाव के बीच भारत जैसे खरीदारों के सामने जोखिम और सस्ते तेल के बीच दुविधा है.
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Iraq Oil Discount: हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में चल रहे तनाव ने वैश्विक तेल बाज़ार को हिलाकर रख दिया है. हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल की सप्लाई बुरी तरह से बाधित है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है, जो लगातार बढ़ रही हैं. इस बीच, एक अहम कदम उठाते हुए इराक ने अपने तेल खरीदारों को भारी छूट देने की पेशकश की है. इसमें भारत भी शामिल है, जो लंबे समय से इराक का एक प्रमुख ग्राहक रहा है.
इराक की सरकारी तेल कंपनी SOMO ने मई में लोड होने वाले कच्चे तेल की कीमतों में भारी कटौती की घोषणा की है. 'बसरा मीडियम' ग्रेड पर 33.40 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट दी जा रही है, जबकि 'बसरा हेवी' लगभग 30 प्रति बैरल कम कीमत पर उपलब्ध है. लेकिन, इस पेशकश के साथ एक बड़ा जोखिम भी जुड़ा हुआ है. इराक का अधिकांश तेल फ़ारसी खाड़ी में स्थित टर्मिनलों से आता है और इन टर्मिनलों से तेल ले जाने वाले जहाज़ों को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुज़रना पड़ता है. मौजूदा हालात को देखते हुए इस रास्ते को बेहद असुरक्षित माना जा रहा है, जिससे जहाज़ों और उनके चालक दल, दोनों के लिए जोखिम बढ़ गया है.
कितने टैंकर होते हैं रवाना
बढ़ते संघर्ष के कारण फरवरी के अंत से ही इस क्षेत्र में जहाज़ों की आवाजाही बुरी तरह से बाधित हो गई है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि अप्रैल में इराक के बसरा बंदरगाह से केवल दो टैंकर ही तेल लोड कर पाए, जो सामान्य हालात से बिल्कुल अलग है. सामान्य तौर पर हर महीने इस बंदरगाह से लगभग 80 टैंकर रवाना होते हैं. मार्च में यह आंकड़ा 12 था, जिसके बाद यह गिरकर लगभग नगण्य स्तर पर पहुंच गया. इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच हालिया झड़पों ने पिछले चार हफ़्तों से लागू संघर्ष-विराम की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे जहाज़ों को निकालने के लिए चल रहे अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा.
इराक से खरीदता है भारत तेल
भारत के लिए मौजूदा हालात बेहद अहम हैं, क्योंकि इराक लंबे समय से उसका प्रमुख कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता रहा है. 2022 में भारत की कुल तेल खरीद में इराक की हिस्सेदारी 26% थी, जबकि 2024 में भारत ने इराक से 28–29 अरब डॉलर का तेल आयात किया. 2026 की शुरुआत में रूसी तेल पर कड़े प्रतिबंधों के बाद भारत ने इराक से आयात बढ़ाया, जो फरवरी तक 11.8 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया. लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बाधाओं के चलते अप्रैल 2026 में यह आयात लगभग शून्य हो गया.