Israel Attack Lebanon: इजराइल ने लेबनान में जो किया उसकी जांच की जाएगी. इजराइल पर वॉर क्राइम करने का इल्जाम लगा है. पूरी खबर पढ़ने के लिए स्क्रॉल करें.
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Israel Attack Lebanon: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बुधवार को कहा कि हिजबुल्लाह के साथ हालिया जंग के दौरान एम्बुलेंस, पैरामेडिक्स और हेल्थ सर्विस पर इजरायल के हमलों की वॉर क्राइम के तौर पर जांच की जाएगी. 27 नवम्बर को हुए सीजफायर समझौते से हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच एक साल से ज्यादा से चल रही दुश्मनी पर रोक लग गई है, जिसमें दो महीने का भीषण युद्ध भी शामिल है. इस जंग में इजराइल ने अपनी सेना लेबनान की जमीन पर भेजी थी.
जंग के दौरान, इज़रायली सेना ने आरोप लगाया था कि हिजबुल्लाह ने अपने लड़ाकों के लिए एंबुलेंस का इस्तेमाल किया था, हालांकि ग्रुप ने इन आरोपों से इनकार किया था. एमनेस्टी के मुताबिक, "लेबनान में युद्ध के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं, एम्बुलेंस और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर इजरायली सेना के बार-बार गैरकानूनी हमले किए, जिसकी जांच होनी चाहिए.
संगठन ने लेबनान सरकार से गुजारिश की है कि वह इंटरनेशनल आपराधिक न्यायालय को लेबनानी इलाके में रोम संविधि के अंतर्गत किए गए अपराधों की जांच और मुकदमा चलाने का अधिकार दे, और पीड़ितों के इलाज के अधिकार को सुनिश्चित करे."
दिसंबर में, लेबनान के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री फिरास अबियाद ने कहा था, "अस्पतालों पर 67 हमले हुए, जिनमें 40 अस्पताल सीधे निशाना बनाए गए थे. जिसमें 16 लोग मारे गए थे." इसके साथ ही उन्होंने कहा था,"इमरजेंसी रेसपॉन्स ऑर्गनाइजेशन पर 238 हमले हुए, जिनमें 206 लोग मारे गए, दमकल गाड़ियों और एम्बुलेंसों सहित 256 आपातकालीन वाहनों को भी निशाना बनाया गया."
एमनेस्टी ने कहा कि उसने पिछले साल 3 से 9 अक्टूबर के बीच बेरूत और साउथ लेबनान में स्वास्थ्य सुविधाओं और वाहनों पर चार इज़रायली हमलों की जांच की, जिसमें 19 स्वास्थ्य देखभाल कर्मी मारे गए, 11 अन्य घायल हो गए और "कई एम्बुलेंस और दो मेडिकल फेसिलिटी क्षतिग्रस्त या तबाह हो गईं"
बयान में कहा गया, "एमनेस्टी इंटरनेशनल को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि हमलों के समय सुविधाओं या वाहनों का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था." मानवाधिकार समूह ने कहा कि उसने नवंबर में इजरायली सेना को अपने निष्कर्षों के बारे में पत्र लिखा था, लेकिन प्रकाशन के समय तक उसे कोई जवाब नहीं मिला था.
एमनेस्टी ने कहा कि, "इजरायली सेना ने हमले के स्थानों पर सैन्य लक्ष्यों की उपस्थिति के पर्याप्त औचित्य या विशिष्ट सबूत नहीं दिए हैं" जिससे "बार-बार हमले हुए, जिससे नाजुक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली कमजोर हुई और लोगों की जान जोखिम में पड़ गई." लेबनानी अथॉरिटी के मुताबिक 4 हजार ज्यादा लोग इस जंग में मारे गए हैं.