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Gaza Genocide: इजरायली सेना गज़ा में नरसंहार कर रही है. इस बात को दुनिया भर के कई संस्थाएं और नरसंहार पर अध्ययन करने वाले विद्वान कह रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ के अलग-अलग शाखा गज़ा की भयावह स्थिति को लेकर लगातार रिपोर्ट जारी कर रही है. दुनिया भर के अमनपसंद लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं और गज़ा में फिलिस्तीनियों का नरसंहार बंद करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन ब्रिटेन का मानना है कि गज़ा में इजरायल नरसंहार नहीं कर रहा है.
दरअसल, ब्रिटेन की सरकार का यह मानना है कि पिछले दो सालों में इजरायली सेना ने गज़ा में जो कुछ भी किया है, उसे नरसंहार में नहीं गिना जा सकता. जबकि, दुनिया भर की मीडिया, अखबार और सोशल मीडिया पर इजरायली सेना द्वारा की जा रही युद्ध अपराधों और फिलिस्तीनियों की सामूहिक हत्याओं की अनगिनत सबूत हैं. इन सब के बावजूद ब्रिटेन के उप-प्रधानमंत्री डेविड लैमी ने बीते 1 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय विकास समिति के अध्यक्ष को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने बताया कि गज़ा में इजरायल नरसंहार नहीं कर रहा है.
हालांकि इन दो सालों के बीच ब्रिटेन ने कई बार इजरायल पर गज़ा में युद्ध को समाप्त करने को लेकर दबाव भी बनाया है. दुनिया के कुछ देशों में फिलिस्तीन के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं, उनमें से एक ब्रिटेन भी है. यह सरकार के पिछले रुख से काफी अलग है, जहाँ यह कहा गया था कि सिर्फ अदालतें ही यह तय कर सकती हैं कि इजरायल, गज़ा में नरसंहार कर रहा है या नहीं! इसके उलट ब्रिटेन की उप-प्रधानमंत्री ने साफ कह दिया है कि इजराल, गज़ा में नरसंहार नहीं कर रहा है.
नरसंहार को रोकना ब्रिटिश सरकार की है जिम्मेदारी?
उप-प्रधानमंत्री डेविड लैमी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विकास समिति के अध्यक्ष सारा चैंपियन को लिखे एक पत्र में, लैमी, जो उस समय विदेश सचिव थीं, ने स्वीकार किया कि यदि ब्रिटिश सरकार को लगता है कि नरसंहार होने का गंभीर खतरा है, तो नरसंहार सम्मेलन (1948) के अनुच्छेद 1 के तहत नरसंहार को रोकना ब्रिटिश सरकार की जिम्मेदारी है.
इजरायल को दुनिया के देश रोकने में रहे असफल?
अब सवाल यह उठता है कि ब्रिटेन के उप-प्रधानमंत्री गज़ावासियों के कतलेआम को नरसंहार क्यों नहीं मान रहे हैं? कहीं इस लिए तो नहीं कि नरसंहार के इल्जाम में इजरायल के खिलाफ एक्शन लेने से ब्रिटेन बचना चहाता है. दूसरा सवाल यह है कि जब दुनिया के सामने लाखों लोगों को एक जगह से दूसरे जगह विस्थापित किया जा रहा है, उन्हें मारा जा रहा है, उनके घरों, दुकानों, मकानों और खेत-खलियानों को नष्ट किया जा रहा है. इन सब के बावजूद दुनिया की ताकतवर देश इसे रोकने में असफल क्यों हो रहे हैं, क्या वे इस जंग को रोकना ही नहीं चाहते?