Israel Killing Childrens in Lebanon: लेबनान में बढ़ती हिंसा पर UNICEF ने चिंता जताई है, जहां इजरायली हमलों में बच्चों की मौतें बढ़ रही हैं. इजरायली क्रूरता को देखकर ग़ज़ा और ईरान में हुए कत्लेआम की अब लेबनान में नरसंहार की आशंका जताई है. इजरायली हमले में लेबनान में 33 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि मानवाधिकार संस्था और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह आंकड़ा इसका तीन गुना हो सकता है.
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Middle East Crisis: जब दुनिया शांति की बात करती है, उसी वक्त बमों की गूंज मासूम बच्चों की चीखों को दबा रही है. अमेरिका और इजरायल ने पूरी दुनिया को अशांत कर दिया है. एक तरफ अमेरिका लगातार मुल्कों में शांति के नाम पर कत्लेआम मचा रहा है, दूसरी तरफ इजरायल के नेतन्याहू सरकार पलगातार मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों में हमले कर बेगुनाहों को मौत के घाट उतार रही है.
कई दशकों तक परमाणु हथियार का राग अलापने के और एक नैरेटिव सेट कर इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर दिया. वहीं, जब डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-इजरायल और ईरान में सीजफायर का ऐलान किया तो नेतन्याहू की सरकार को यह बात रास नहीं आई है. इजरायल ने महज 10 मिनट में लेबनान के 100 से ज्यादा इलाकों में ताबड़तोड़ हमले कर 250 से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी, और इसमें कई लोग घायल हुए हैं. इस जंग में सबसे ज्यादा कीमत मासूम बच्चे और औरतों को उठाना पड़ रहा है.
UNICEF ने लेबनान में बढ़ती हिंसा को लेकर गहरी चिंता जताई है. संस्था का कहना है कि लगातार हो रहे हमले बच्चों पर बेहद क्रूर और अमानवीय असर डाल रहे हैं. हाल ही में, जब सीजफायर की उम्मीदें फिर से जगी ही थीं, तभी कुछ ही मिनटों में इजरायल ने हवाई हमला कर कई इलाकों को निशाना बनाया. इन हमलों में कम से कम 33 बच्चों की मौत हो गई, जबकि 153 अन्य घायल हो गए.
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यूनीसेफ के मुताबिक, बच्चों और उनके परिवारों को भीषण बमबारी का सामना करना पड़ा, जिससे पूरे समुदाय के लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. 2 मार्च से अब तक लेबनान में करीब 600 बच्चे या तो मारे जा चुके हैं या घायल हुए हैं. संस्था ने बताया कि हमलों के बाद कई बच्चों को मलबे के नीचे से निकाला गया, जबकि बड़ी संख्या में बच्चे अब भी लापता हैं या अपने परिवारों से बिछड़ गए हैं. इसके अलावा जिन बच्चों ने अपने परिजनों, घर और सुरक्षा की भावना को खो दिया है, वे गहरे मानसिक आघात से गुजर रहे हैं.
यूनीसेफ ने यह भी जानकारी दी कि लेबनान में अब तक 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें लगभग 3 लाख 90 हजार बच्चे शामिल हैं. इनमें से कई बच्चों को बार-बार अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है. संस्था ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों, खासकर बच्चों की हर हाल में सुरक्षा जरूरी है. जंग में शामिल सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम लोगों और जरूरी ढांचे को नुकसान न पहुंचे, और राहत कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहना चाहिए.
अलजजीरा की हालिया रिपोर्ट मुताबिक, लेबनान 2 मार्च से अब तक इजरायली हवाई हमलों में 1,530 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इन हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल हैं, जिनमें 100 से ज्यादा औरतें और 130 से ज्यादा बच्चे भी मारे गए हैं. लगातार हो रही बमबारी ने न सिर्फ जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे देश में डर और असुरक्षा का माहौल बना दिया है. स्थिति इतनी भयावह है कि 12 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं. ये लोग अब अलग-अलग सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं.
ईरान में बच्चों और महिलाओं इजरायल-अमेरिका का बरसा कहर
लेबनान पहला देश नहीं है, जहां पर हालिया दिनों में नेतन्याहू के आदेश पर यहूदी फौज ने बड़े पैमाने पर नरसंहार कर रही है. इससे पहले 28 फरवरी से इजरायली हमलों में ईरान में भी बड़ी संख्या में मौत की खबरें सामने आई हैं, इसमें भी सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे और औरतें रही हैं. 28 फरवरी 2026 को दक्षिणी ईरान के हॉर्मोजगान प्रांत के मिनाब शहर में शजराह तय्याबेह गर्ल्स स्कूल पर अमेरिका और इजरायल ने हमला कर 175 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतकों में 150 से ज्यादा 7 से 12 साल की थीं.
अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान में 3,636 लोगों की मौत हुई है. मृतकों में 2500 से ज्यादा आम नागरिक हैं. इसके उलट Hengaw जैसे कई स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट्स में मरने वालों का आंकड़ा 7,600 से बताया जा रहा है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि मृतकों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है. इस जंग में सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे और औरतें हुईं. HRANA और UNICEF जैसी संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में 300 से ज्यादा बच्चे मारे गए हैं, जबकि 250 से ज्यादा औरतों की भी मौत हुई है. हालांकि, सीजफायर के बाद इस पर कुछ हदतक लगाम लगा है.
इजरायल ने ग़ज़ा की 10 फीसदी आबादी कर दी खत्म
अब बात करते हुए दुनिया के सबसे ज्यादा जंग से प्रभावित क्षेत्र ग़ज़ा की. 7 अक्टूबर 2023 से इजरायल लगातार ग़ज़ा पर बमबारी कर रहा है. आलम यह है कि ग़ज़ा की लगभग 90 फीसदी बुनियादी सुविधाएं ध्वस्त हो चुकी हैं, और इन मलबों को इसी रफ्तार से हटाने में 10 से 12 साल लगेंगे. ग़ज़ा हेल्थ मिनिस्ट्री और मानवाधिकार संस्थाओं की रिपोर्ट के मुताबिक, ग़ज़ा में 72,300 से ज्यादा लोग मारे गए, इनमें से 56.2 फीसदी बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं.
इजरायली हमलों में ग़ज़ा में 172,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, इनमें से कई फिलिस्तीनी हमेशा के लिए अपाहिज हो गए, कईयों के आंखों की रौशनी चली गई, जबकि कई लोग अब खुद से कुछ भी करने के लायक नहीं रहे हैं. वहीं, बड़ी संख्या में लोग लापता है, जिनकी तलाश जारी है. रेस्क्यू टीमें और मानवाधिकार संस्थाओं की मानें तो लापता लोगों में से ज्यादातर लोगों की मौत हो चुकी है, और बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी नागिरकों को यहूदी फौज ने अवैध तरीके से जेल में डाल दिया है. घायलों और जेलों में बंद कई ऐसे बच्चे और औरतें शामिल हैं, जिनको यह तक नहीं पता कि उनका जुर्म क्या है? Geneva Academy के अध्ययन के मुताबिक, इजरायल ने ग़ज़ा की 10 फीसदी से ज्यादा आबादी खत्म कर दी.
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