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Israel Attack on Gaza: ग़ज़ा में सीजफायर के बावजूद इजरायली फौज लगातार फिलिस्तीनियों का नरसंहार कर रही है. शनिवार (22 नवंबर) को यहूदी फौज ने फिलिस्तीन की जमीन पर कब्जा करने के मकसद से हवाई हमले किए. ग़ज़ा के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इस हवाई हमलों में कम से कम 24 बेगुनाव फिलिस्तीनियों की मौत हो गई और 54 लोग घायल हुए, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं.
यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब ग़ज़ा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरगर्मियां बढ़ गई हैं. कई देशों ने फिलिस्तीन को एक देश के रुप में औपचारिक रूप से मान्यता दे दी है, दूसरी तरफ नेतन्याहू और इजरायली फौज का पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है. सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अमेरिकी प्रस्ताव को मंजूरी दी.
इस प्रस्ताव में ग़ज़ा में सुरक्षा व्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय फौज की तैनाती और प्रशासनिक व्यवस्था को चलाने के लिए एक अथॉरिटी बनाने की योजना शामिल है. इसकी निगरानी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प करेंगे.
इजरायल पहले भी संघर्ष विराम के दौरान इसी तरह के हमले करता रहा है. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार और गुरुवार के बीच 12 घंटे में 33 फिलिस्तीनियों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर औरतें और बच्चे थे. शनिवार को इजरायली फौज ने ग़ज़ा सिटी के रिमाल इलाके में एक वाहन पर एयरस्ट्राइक की गई, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा घायल हो गए.
इस संबंध में शिफा अस्पताल के निदेशक मोहम्मद अबू सलमिया ने बताया कि घायल बच्चों की संख्या ज्यादा है. इस हमले क वीडियो में देखा जा सकता है कि गाड़ी बुरी तरह जल गई है और ऊपर का हिस्सा उड़ा हुआ दिखाई दे रहा है. इसी तरह यहूदी फौज ने अल-अवदा अस्पताल के पास एक घर पर हमला कर 3 लोगों की हत्या कर दी और 11 लोगों को घायल कर दिया.
नेतन्याहू की फौज ने आज ही ग़ज़ा में नुसरत कैंप में भी एक घर पर हमला किया, जिसमें कम से कम 7 लोग मारे गए. मृतकों में एक बच्चा भी शामिल है. हमले में 16 लोग घायल हैं. दीर अल-बलाह में नाम की जगह पर भी इजरायली ने भीषण हवाई हमला किया है. इसमें एक औरत समेत तीन लोगों की मौत हो गई.
दीर अल-बलाह के निवासी खलील अबू हातब ने इजरायली जुल्म को बयां करते हुए भावुक हो गए. खलील अबू हातब ने बताया कि "अचानक एक तेज धमाका हुआ और इलाके में धुआं फैल गया. कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. जब फिर देखा तो पड़ोसी के घर का ऊपरी हिस्सा उड़ चुका था." उन्होंने कहा, "यह संघर्ष विराम बहुत कमजोर है, यहां कोई सुरक्षित जगह नहीं."
बता दें, बीते दो सालों से इजरायली फौज लगातार ग़ज़ा में जमीन और हवाई रास्ते से हमला कर रही है. ग़ज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, यहूदी फौज के हमले में अब तक 69,733 फिलिस्तीनी मारे गए हैं और 170,863 घायल हुए हैं. मरने वालों में ज्यादातर औरतें, मासूम बच्चे और बुजुर्ग हैं. इजरायली फौज ने ग़ज़ा की 80 फीसदी से ज्यादा बुनियादी ढांचे को नेस्तानाबूद कर दिया है.
संघर्ष विराम के बावजूद इजरायली फौज ग़ज़ा में नई बस्ती बसाने और पूरी तरह कंट्रोल करने के मकसद लगातार हमले कर रही है. इसमें हर रोज बड़ी संख्या में आम लोग मारे जा रहे हैं. नेतन्याहू और इजरायली फौज की जुल्म का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां मलबों में अभी भी लगातार लाशें मिल रही हैं. इजरायल लगातार नरसंहार के आंकड़ों को दबाता रहा है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में गूगल, फेसबुक, यूट्यूब समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नेतन्याहू सरकार ने भारी भरकम पैसे दिए, जिससे दुनिया के सामने युद्ध अपराधों को छिपाया जा सके.