Israel on Gaza Peace Deal: ग़ज़ा शांति योजना पर अमेरिका और रूस आमने-सामने हैं, जबकि इजरायल ने फिलीस्तीनी राज्य को सिरे से नामंजूर कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय दबाव और अरब देशों के समर्थन के बावजूद इजरायल का अड़ियल रुख ग़ज़ा संकट के समाधान को और जटिल बना रहा है. इजरायल के नापाक मंसूबे और हिंसक नीति की पूरी दुनिया में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
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Israel Palestine Conflict: इजरायल ने ग़ज़ा में लगभग 69,000 हजार से ज्यादा बेगुनाह फिलिस्तीनियों की हत्या की और इस दौरान एक बड़े भू-भाग पर कब्जा कर लिया. अमेरिका की संरक्षण में यहूदी फौज के हमलों में ग़ज़ा में 80 फीसदी से ज्यादा बुनियादी ढांचे नेस्तानाबूद हो चुके हैं. दुनियाभर में भारी विरोध के बाद इजरायल और हमास के बीच शांति समझौता हुआ, लेकिन इसके बावजूद नेतन्याहू की फौज ग़ज़ा में बमबारी करने से बाज नहीं आ रही है.
ग़ज़ा शांति योजना को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता गहराने लगी है. पिछले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई घटनाएं ऐसी हुई हैं, जिनसे संकेत मिल रहे हैं कि दुनिया दो स्पष्ट धुरियों में बंटती जा रही है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ग़ज़ा युद्धविराम को लेकर अमेरिका और रूस अपने-अपने प्रस्तावों पर जोर दे रहे हैं. इसी बीच इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने अपने नापाक मंसूब जाहिर कर दिये हैं. गिदोन सार ने धमकी दी है कि उनका देश फिलीस्तीनी राज्य की स्थापना के किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करेगा.
द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को यूएनएससी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक ग़ज़ा युद्धविराम योजना पर वोटिंग होनी है. इस प्रस्ताव के मसौदे में एक फिलीस्तीनी राज्य के गठन का संभावित रास्ता भी शामिल हो सकता है. इस योजना को लेकर इजरायल ने सख्त रुख दिखाया है. विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा है कि इजरायल अपने क्षेत्र और जनसंख्या केंद्रों के बेहद करीब किसी भी फिलिस्तीनी इकाई के निर्माण की इजाजत नहीं देगा.
इजरायली विदेश गिदोन सार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "इजरायल की जमीन के सेंटर में, उसके सभी जनसंख्या केंद्रों से बेहद कम दूरी पर और उसके भौगोलिक क्षेत्र के नजदीक किसी फिलीस्तीनी आतंकवादी राज्य की स्थापना के लिए इजरायल राजी नहीं होगा." गिदोन सार का यह बयान तब सामने आया जब शनिवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच फोन पर बातचीत हुई थी.
गुरुवार को UNSC में रूस ने अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में अपना ड्राफ्ट रिजोल्यूशन पेश किया. रूस ने ट्रंप की ग़ज़ा शांति योजना को चुनौती देते हुए कहा कि उसका प्रस्ताव दुश्मनी को पूरी तरह खत्म करने और संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. रूस का दावा है कि अमेरिकी योजना क्षेत्र में तनाव कम करने के बजाय असंतुलन पैदा कर सकती है.
वहीं, अमेरिका ने ट्रंप के प्रस्ताव को आगे बढ़ाना जरूरी बताया है. यूएनएससी में अमेरिका ने कहा कि अगर यह प्रस्ताव मंजूर नहीं किया गया तो फिलीस्तीन के हालात बेहद खराब हो सकते हैं. वॉशिंगटन का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में एक व्यापक युद्धविराम योजना ही क्षेत्र में शांति बहाल करने का रास्ता है.
अमेरिका ने मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की सहित कई अरब और मुस्लिम बहुल देशों के साथ मिलकर शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अमेरिकी समर्थित प्रस्ताव को जल्द से जल्द मंजूर करने की अपील की. एक संयुक्त बयान जारी कर अमेरिका, कतर, मिस्र, यूएई, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, जॉर्डन और तुर्की ने कहा कि वे यूएनएससी के सामने रखे गए मौजूदा मसौदा प्रस्ताव का समर्थन करते हैं और इसके शीघ्र अपनाने की मांग करते हैं.
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