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Hezbollah Disarmament: गाजा-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर है. इज़रायल गाजा से लेकर यमन तक हवाई हमले कर रहा है. इस बीच, लेबनान सरकार ने ऐलान किया है कि इस साल के आखिर तक लेबनान से हिज़्बुल्लाह को खत्म कर दिया जाएगा. यानी, लेबनान में हिज़्बुल्लाह की कोई सैन्य भूमिका नहीं होगी. यह घोषणा राष्ट्रपति जोसेफ औन और प्रधानमंत्री नवाफ़ सलाम के नेतृत्व वाली लेबनान सरकार ने की है.
लेबनान सरकार के इस फैसले का स्वागत इजरायल ने किया है. इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इस फैसले को ऐतिहासिक बता दिया है और लेबनान की संप्रभुता को बहाल करने की दिशा में निर्णायक अवसर बताया है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि यह फैसला न केवल लेबनान बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए स्थिरता और समृद्धि की नई संभावनाएं लेकर आएगा. बयान में कहा गया, "समय आ गया है कि दोनों देश मिलकर हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करें और स्थिरता व समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ें."
वहीं, इजरायल ने साफ कर दिया है कि अगर लेबनानी सेना हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह से ख़त्म करने पर अड़ी रहती है, तो वह लेबनानी सेना की मदद करेगा. साथ ही, इज़रायल लेबनान के साथ अपने संबंध बहाल करेगा और सीमा पर सैन्य दबाव कम कर सकता है. इससे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव और संघर्ष को कम करने में मदद मिल सकती है.
लेबनान का कदम क्यों अहम?
लेबनान लंबे समय से हिज़्बुल्लाह के राजनीतिक और सैन्य प्रभाव से जूझ रहा है. हिज़्बुल्लाह को ईरान का समर्थन प्राप्त है और उसने लेबनान के भीतर समानांतर सत्ता ढांचा खड़ा कर रखा है. चाहे वह सीमा सुरक्षा हो, राजनीतिक फैसले हों या फिर क्षेत्रीय युद्धों में दखल, हिज़्बुल्लाह की भूमिका हमेशा विवादास्पद रही है. लेबनान सरकार के इस निर्णय को देश की संप्रभुता बहाल करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने संसद में कहा था कि लेबनान को अब गैर-राज्यीय ताकतों के प्रभाव से बाहर आकर एक मज़बूत और स्वतंत्र राष्ट्र की तरह खड़ा होना होगा.