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Australia News Today: इजराइली बमबारी और नाकाबंदी की वजह से गजा में मासूम बच्चे मलबों में दबकर और भूख से दम तोड़ रहे हैं. ऐसे में जब यहूदी फौज के जरिये अस्पतालों पर बम बरसाए जा रहे हैं और एक पूरी आबादी को भूख और बर्बादी के गर्त में धकेला जा रहा हो, तब दुनिया की सहानुभूति उस जालिम के बजाय मजलूमों के साथ खड़ी होती दिखाई पड़ रही है.
आलम यह है कि इजराइली की नेतन्याहू सरकार के जरिये बेगुनाह फिलिस्तीनियों पर किए जा रहे जुल्म के खिलाफ पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है और इसका खामियाजा इजराइली नागरिकों को दूसरे देशों में भी झेलना पड़ रहा है. इसी तरह का एक मामला ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में देखने को मिला है, जहां एक सैलून की महिला ऑनर ने यहूदी फौज के खिलाफ अपना विरोध जताने के लिए एक इजराइली नागरिक को सैलून से बाहर निकाल दिया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के शहर मेलबर्न में एक इजराइली महिला ने दावा किया कि जब वह एक जगह सैलून में गई तो उसे बाहर निकाल दिया गया. इजराइली महिला ने आरोप लगाया कि जैसे ही वह सैलून में दाखिल हुई, तो उसक लहजा देखकर सैलून की मालकिन उसके पास आ गई. सैलून की मालकिन ने पूछा "तुम कहां से हो?" इस पर उसने जब दिया कि "इजराइल से."
आरोप लगाने वाली महिला ने दावा किया जब सैलून मालकिन ने सुना कि वह इजराइल से है, तो उन्होंने कहा कि यहां तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है. तुम लोग गजा के बेगुनाह और मासूम बच्चों के नरसंहार के मुल्जिम है. यहां से निकल जाओ. इजराइली महिला का आरोप है कि इसके बाद सैलून की मालकिन ने में मुझे बाहर जाने का इशारा करते हुए दरवाजा बंद कर दिया. यहूदी महिला का आरोप है कि "जब वह सैलून से बाहर निकल रही थी, तब भी उससे कहा गया कि तुम लोग बच्चों के नरसंहार के मुल्जिम हो."
इजराइली नागरिकों के खिलाफ दुनिया में बढ़ रही नफरत को लेकर जामिया मिल्लिया इस्लामिया के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ ओबैदुल ओला ने कहा कि "मानवीय दृष्टिकोण से यह गलत है, लेकिन दुनिया में इजराइलियों के विरोध की एक वजह यह भी है कि वहां का हर नागरिक फौज में काम करता है. इसलिए लोगों का मानते हैं कि नेतन्याहू सरकार ने गाजा में फिलिस्तीनियों का जो नसंहार किया है, उसके लिए वहां के आम नागरिक भी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने फौजन में काम किया."
बदसे-बदतर हैं गाजा के हालात
बता दें, इजराइली फौज 7 अक्टूबर 2023 से लगातार गाजा में फिलिस्तीनियों का नरसंहार कर रही है. इजराइली हमलों में अब तक 62 हजार 4 लोगों फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है, जबकि 1 लाख 56 हजार 230 लोग घायल हैं. प्रभावितों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. इस दौरान 11 हजार फिलिस्तीनी लापता हो गए, जिनका अब तक कोई सुराग नहीं लगा है.
गजा की भयावह स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इजराइली हमलों में वहां की 75 फीसदी से ज्यादा बुनियादी सुविधाएं और रिहाइश तबाह हो चुके हैं. बीते कई महीनों से यहूदी फौज ने गाजा को अवैध तरीके से सील कर दिया है, जिससे वहां खाने-पीने और दवाईंयों की किल्लत हो गई है. अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अगस्त भुखमरी और कुपोषण से फिलिस्तीन में 266 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 122 बच्चे शामिल हैं. गजा के हालात को देखते हुए इजराइल और वहां के नागरिकों के खिलाफ पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है.