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Gaza News Update: ग़ज़ा पर कब्जा करने और फिलिस्तीनियों को वहां से हटाने के लिए नेतन्याहू सरकार सारे हथकंडे अपना रही है. सीजफायर के बावजूद इजरायली फौज लगातार हमास की आड़ में बेगुनाह लोगों पर बमबारी कर रही है और नई बस्तियां बस रही है. यहूदी फौज ने बीते दो सालों में ग़ज़ा में 80 फीसदी से ज्यादा बुनियादी ढांचों को ध्वस्त कर दिया है, इसकी वजह से भूख और प्यास से निढाल फिलिस्तीन के लोग दोबारा अपने घरों तक लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं.
अब नेतन्याहू सरकार और इजरायली फौज ने फिलिस्तीन और मुसलमानों के गौरवशाली इतिहास को मिटाने के लिए नई साजिशें शुरू कर दी हैं. ग़ज़ा के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि इजरायली फौज ने ग़ज़ा सिटी मौजूद ऐतिहासिक अल-बाशा पैलेस म्यूजियम से 17,000 से ज्यादा पुरातात्विक कलाकृतियां (Artefacts) चुरा ली हैं. यह म्यूजियम ममलूक शासन काल का बताया जा रहा है. इसमें कई ऐतिहासिक तथ्यों को संजो कर रखा गया है.
फिलिस्तीनी अधिकारियों ने बताया कि इजरायल की दो साल लंबी सैन्य कार्रवाई के दौरान यह म्यूजियम पहले बमबारी कर नेस्तानाबूद कर दिया गया और बाद में बुलडोजर से पूरी तरह ढहा दिया गया. ग़ज़ा पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ और अल-बाशा पैलेस के रिस्टोरेशन वर्क के सुपरवाइजर हमूदा अल-दहदार ने बताया कि म्यूजियम में ममलूक सल्तन की हजारों ऐतिहासिक चीजें मौजूद थीं.
हमूदा अल-दहदार ने बताया कि इजरायली हमलों और बुलडोजिग के बाद म्यूजियम के खंडहरों से सिर्फ 20 पुरातात्विक चीजें ही बरामद हो सकी हैं, जबकि बाकी 17,000 वस्तुएं रहस्यमयी तरीके से गायब हो गईं. अल-दहदार के मुताबिक, चोरी की गई चीजों में इतिहास के कई महत्वपूर्ण कालों की धरोहरें शामिल थीं. इनमें ममलूक काल के हथियार, ओटोमन सल्तन की ऐतिहासिक चीजें, बाइजेंटाइन और रोमन दौर की बहुमूल्य सामग्री, प्राचीन काल की दुर्लभ मूर्तियां और सिक्के, हजारों साल पुराने मिट्टी के बर्तन शामिल थे. उन्होंने दावा किया कि इतनी बड़ी मात्रा में की गई यह लूट इजरायली फौज के जरिये ही की गई है, क्योंकि कब्जे के समय में इस जगह पर इजरायली फौज मौजूद थी और किसी अन्य पक्ष को वहां जाने की इजाजत नहीं थी.
अल-बाशा पैलेस को कसर अल-बाशा भी कहा जाता है. अल-बाशा पैलेस को ग़ज़ा की 800 साल पुरानी पहचान और ऐतिहासिक धरोहरों का केंद्र माना जाता है. 13वीं सदी में ममलूक सल्तनत के दौरान यह महल किला और शासकीय निवास के रूप में इस्तेमाल होता था. समय के साथ इसको एक महत्वपूर्ण म्यूजियम में बदल दिया गया, जहां ग़ज़ा की प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुएं, कलाकृतियाँ, सिक्के, मिट्टी के बर्तन और अन्य दुर्लभ संग्रह सुरक्षित रखे गए थे. यह म्यूजियम ग़ज़ा की सांस्कृतिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक पहचान का एक अहम निशानी थी.
फिलिस्तीनी पर्यटन और पुरातत्व मंत्रालय के मुताबिक, दिसंबर 2023 में इजरायली फौज ने अल-बाशा पैलेस पर एयरस्ट्राइक की थी. इसके कुछ ही दिनों बाद इस ऐतिहासिक स्थल पर बुलडोजर चलाकर इसे पूरी तरह से मलबे में बदल दिया. इस हमले ने ग़ज़ा की सदियों पुरानी धरोहर को गहरी चोट पहुंचाई.
फिलिस्तीनी मंत्रालय का कहना है कि इजरायल ने ग़ज़ा में सैकड़ों पुरातात्विक और धार्मिक विरासत स्थलों को जानबूझकर निशाना बनाया है. इसका मकसद फिलिस्तीन की ऐतिहासिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और अस्तित्व की मूल जड़ों को मिटाना है. यह हमला सिर्फ एक म्यूजियम या महल पर नहीं बल्कि पूरे इतिहास और सभ्यता पर हमला है.
फिलिस्तीन का दावा है कि अल-बाशा पैलेस की 800 साल पुरानी धरोहर का गायब होना एक संगठित सांस्कृतिक लूट है. यह सिर्फ चोरी का मामला नहीं बल्कि फिलिस्तीन के इतिहास और पहचान को खत्म करने की कोशिश है. अभी भी 17,000 से ज्यादा ऐतिहासिक धरोहरों का कोई पता नहीं चल सका है. म्यूजियम से ऐतिहासिक वस्तुओं के चोरी होने पर दुनियाभर के लोगों विद्वानों ने चिंता जताई है.