Muslim Cemetery Dispute in Japan: जापान में बढ़ती मुस्लिम आबादी के साथ कब्रिस्तानों की कमी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है. इस्लाम में दाह संस्कार वर्जित होने की वजह से मुसलमानों को दफनाने के लिए वैकल्पिक जमीन की जरुरत है. जापान सरकार और स्थानीय प्रशासन भी इसमें मदद के लिए तैयार है, जबकि भारत के कई मीडिया संस्थानों ने इसके उलट दावा किया है कि वहां के प्रशासन ने मुसलमानों को कब्र की जमीन देने से मना कर दिया है.
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Japan News Today: जापान का शुमार दुनिया के सबसे शांति पसंद देशों में होता है. जापान अपने रहन-सहन, लग्जरी लाइफ और रोजमर्रा की अनुशासनात्मक जिंदगी को लेकर हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा है. इस बीच जापान से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा है. दरअसल, जापान में बढ़ती मुस्लिम आबादी के बीच वहां कब्रिस्तान की जगह कम पड़ रही है, ऐसे में यहां नए जगह की जरुरत महसूस हो रही है.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान के 47 प्रांतों में 2.3 लाख से 4.2 लाख आबादी है. मुसलमानों की कुल आबादी जापानी की आबादी का महज 0.18 फीसदी से 0.33 फीसदी है. मुसलमानों की 80 फीसदी आबादी जापान के तीन महानगरीय क्षेत्रों टोक्यो, चूकीयो और किंकी में बसी है. मुसलमानों की बढ़ती आबादी के बीच यहां पर उनके लिए कब्रिस्तान और इबादतगाहों की सख्त जरुरत है.
बताया जा रहा है कि जापान में प्रशासन का एक बड़ा वर्ग मुसलमानों के लिए नई कब्रगाह के लिए जमीन उपलब्ध कराने को तैयार है, जबकि कुछ चुनिंदा लोग इस दिशा में मदद नहीं करना चाहता है. जापान में अंतिम संस्कार के लिए ज्यादातर लोग दाह संस्कार को ही अपनाते हैं. आंकड़ों के मुताबिक, देश के 99.9 फीसदी कब्रिस्तानों में सिर्फ दाह संस्कार की इजाजत है. इस वजह से जापान में रहने वाले मुसलमान अपनी धार्मिक मान्यताओं को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि इस्लाम में शव को जलाना सख्ती से मना किया गया है.
मुसलमानों के लिए शव दफनाने के लिए सबसे ज्यादा जरुरत इस वजह से है कि यहां की मूल आबादी के अलावा भी हालिया दिनों में दूसरी जगह से मुसलमान पहुंचे हैं. इसकी वजह यह है कि जापान ने इंडोनेशिया सहित कई देशों से कामगारों को आमंत्रित किया है. इसी को मद्देनजर रखते हुए मियागी प्रांत के गवर्नर योशिहिरो मुराई ने दिसंबर 2023 में कहा कि मुस्लिम आबादी को देखते हुए नए कब्रिस्तान की योजना पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को 'बहुसांस्कृतिक समाज' की बात सिर्फ कहने के बजाय उस दिशा में ठोस कदम भी उठाने चाहिए, क्योंकि वर्तमान में क्षेत्र में कोई भी मुस्लिम कब्रिस्तान मौजूद नहीं है.
दूसरी ओर दक्षिण-पश्चिमी जापान के हिजी शहर में कब्रिस्तान बनाने की योजना को रद्द कर दिया गया. यहां नए मेयर बने तेत्सुया आबे ने सार्वजनिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव का विरोध किया और इसके बाद योजना को रद्द कर दिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल जापान में सिर्फ 10 बड़े धार्मिक कब्रिस्तान ही मौजूद हैं, जिसमें मुसलमानों के लिए शवों के दफन के सहूलियत कुछ जगहों पर है.
जापान के कानून में जमीन पर दफनाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन यह फैसला पूरी तरह स्थानीय प्रशासन के विवेक पर निर्भर करता है कि वे ऐसी कब्रगाहें स्थापित करें या नहीं. वसेदा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हीरोफुमी तनाडा के मुताबिक, साल 2024 में जापान में मुस्लिम आबादी लगभग 3.5 लाख अनुमानित की गई है. ऐसे में दफनाने की सहूलियत की कमी आने वाले समय में और ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है. इसलिए सभी प्रांतों के स्थानीय प्रशासन को इस पर गहनता से विचार करने की जरुरत है.
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