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Afghanistan Pakistan Ceasefire: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच कई दिनों की हिंसा के बाद युद्धविराम समझौता हो गया है. फिर भी दोनों के बीच हिंसा का दौर जारी है. इस बीच, काबुल और इस्लामाबाद के बीच युद्धविराम पर चर्चा फिर से शुरू हो गई है. यह बैठक इस्तांबुल में हुई है. इसमें मुख्य रूप से सीजफायर बढ़ाने, हवाई क्षेत्र और जमीन की संप्रभुता के प्रति आपसी सम्मान बनाए रखने पर चर्चा हो रही है.
अफगानिस्तान की तरफ से इस्लामिक अमीरात का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मौजूद है, जिसकी अगुवाई उप-गृह मंत्री रहमतुल्लाह नजीब कर रहे हैं. अफगान प्रतिनिधिमंडल में कतर में अफगानिस्तान के कार्यवाहक राजदूत सुहैल शाहीन, अनस हक्कानी, नूर अहमद नूर, नूरुल रहमान नुसरत और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी शामिल हैं.
सियासी एक्सपर्ट अजीज स्तानेकज़ई ने कहा कि यह बातचीत आखिरी स्टेज में है और अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंधों में नया अध्याय शुरू कर सकती है. उन्होंने पाकिस्तान से अपील की कि वह अफगान हवाई क्षेत्र का सम्मान करे. पाकिस्तान की ओर से सात सदस्यीय दल बातचीत में शामिल है, जिसमें राजनयिक और खुफिया अधिकारी शामिल हैं. इनमें पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों को रोकने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाना, राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए कानूनों को लागू करना, पिछले 20 वर्षों की सुरक्षा चुनौतियों की समीक्षा करना और व्यापार बाधाओं और अफगान शरणार्थियों के जबरन निर्वासन का समाधान करना शामिल है.
फजल मनन ने दी चेतावनी
सियासी एक्सपर्ट फजल मनन मुंतज़ ने कहा कि दोहा और इस्तांबुल की वार्ता दिखाती है कि अफगानिस्तान अपने मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के जरिए हल करना चाहता है. लेकिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो उनके पास दूसरे विकल्प हैं और खुले टकराव की संभावना भी है. उन्होंने बताया कि वार्ता दो-तीन घंटे पहले शुरू हुई थी और नतीजे जल्दी ही सामने आ सकते हैं.
अफगानिस्तान को है इस बात का डर
पाकिस्तान में पूर्व अफगान राजनयिक आमिर मोहम्मद घरान ने कहा कि हालांकि बातचीत अच्छी बात है, लेकिन उन्हें पाकिस्तान की ईमानदारी पर शक है. उन्होंने पिछले अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने पहले भी बातचीत में पारदर्शिता नहीं दिखाई. इससे पहले आर्थिक मामलों के उप-प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने कहा था कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए ईमानदार बातचीत और सहयोग बेहद जरूरी है. पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी विवादों को जिम्मेदारी से सुलझाने पर जोर दिया.