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US News Today: ग़ज़ा में इजराइली फौज के नरसंहार के पीछे दुनियाभर शांति का ढिंढोरा पीटने वाले अमेरिका और यूरोपी देशों की मिली भगत किसी से छुपी नहीं है. आलम यह है कि अपने आप को खुले विचार और लोकतांत्रिक मूल्यों का कथित रखवाला होने का दावा करने वाला अमेरिका अब इजराइली नरसंहार का विरोध करने वालों पर कार्रवाई कर रही है.
अमेरिकी इमिग्रेशन जज ने फिलिस्तीन समर्थक कार्यकर्ता महमूद खलील की देशनिकाला (डीपोर्टेशन) का आदेश दिया है. इस कार्रवाई के बाद महमूद खलील को या तो अल्जीरिया या फिर सीरिया भेजा जा सकता है. यह फैसला उस आरोप के बाद आया, जिसमें दावा किया गया है कि खलील ने अपने ग्रीन कार्ड आवेदन में कुछ जानकारियां छिपाई थीं.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, लुइसियाना में तैनात जज जेमी कोमान्ज़ ने कहा कि खलील ने इमिग्रेशन प्रक्रिया को दरकिनार करने के लिए तथ्यों को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया. अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) को दिए बयान में खलील ने कहा, “यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि ट्रंप प्रशासन मेरी अभिव्यक्ति की आजादी की वजह से मुझसे लगातार बदला ले रहा है.”
महमूद खलील फिलिस्तीनी मूल के हैं और अमेरिका में स्थायी निवासी हैं. वह 2024 की ग़ज़ा जंग के दौरान कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हुए प्रदर्शनों में एक प्रमुख चेहरा रहे थे, जहां वे पढ़ाई भी कर रहे थे. सीरिया में जन्मे और अल्जीरियाई नागरिक खलील को 3 महीने तक लुइसियाना के इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर में रखा गया था. बाद में एक संघीय जज ने 20 जून को उनकी रिहाई का आदेश दिया था, यह मानते हुए कि खलील से न तो फरार होने का खतरा है और न ही वह अपने समुदा के लिए खतरा हैं. इसी दौरान उनकी अमेरिकी बीवी ने एक बेटी को जन्म दिया.
खलील के वकीलों ने कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे. उनका दावा है कि अभी भी संघीय अदालत के अलग आदेश लागू हैं, जिनमें सरकार को उनकी गिरफ्तारी या देशनिकाला से रोका गया है. मार्च 2024 में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) ने खलील को तब हिरासत में लिया था, जब ट्रंप प्रशासन ने उन यूनिवर्सिटीज पर कड़ी कार्रवाई शुरू की थी जिन पर आरोप था कि वे यहूदी-विरोधी गतिविधियों पर काबू पाने में नाकाम रही हैं.
अमेरिकी सरकार का आरोप है कि खलील ने अपने इमिग्रेशन दस्तावेज़ों में अपनी पुरानी जानकारी छुपाई. इसमें संयुक्त राष्ट्र की फिलिस्तीनी राहत एजेंसी (UNRWA) से जुड़ाव और बेरूत में ब्रिटिश दूतावास में लगातार नौकरी करना शामिल है. वहीं, खलील ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “जब देशनिकाला की पहली कोशिश नाकाम हुई तो उन्होंने मेरे खिलाफ झूठे और हास्यास्पद आरोप गढ़ दिए ताकि मुझे चुप कराया जा सके, क्योंकि मैं फिलिस्तीन के साथ खड़ा हूं और जारी नरसंहार के खिलाफ आवाज़ उठा रहा हूं.”
जून 2024 में खलील के वकीलों ने 20 मिलियन डॉलर (करीब 147 करोड़ रुपये) का मुकदमा दायर किया था, जिसमें झूठी गिरफ्तारी, दुर्भावनापूर्ण मुकदमा और यहूदी-विरोधी के झूठे आरोपों का जिक्र था. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि फिलिस्तीन समर्थक कार्यकर्ता, जिनमें खलील भी शामिल हैं, हमास का समर्थन करते हैं. अमेरिका ने हमास को एक आतंकी संगठन घोषित किया है.
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में 2024 के प्रदर्शनों के दौरान खलील एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे थे. वह यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे. इजरायल समर्थक संगठनों ने उन पर आरोप लगाया कि वह Columbia University Apartheid Divest (CUAD) नाम के छात्र संगठन के नेता हैं, जो यूनिवर्सिटी से इज़राइल के साथ वित्तीय संबंध तोड़ने और ग़ज़ा जंग में सीजफायर की मांग कर रहे थे. हालांकि खलील ने इन आरोपों से इनकार किया और मीडिया को बताया कि वे सिर्फ प्रदर्शनकारियों के प्रवक्ता और यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ मध्यस्थता कर रहे थे.