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Mohammed Alabbar: अगर दुबई की तरक्की की कहानी को किसी एक नाम में समेटा जाए, तो वह है मोहम्मद अलब्बार. उनकी कहानी किसी अरबपति की चमक-दमक वाली जिंदगी की नहीं, बल्कि जज़्बे, मेहनत और सपनों को हकीकत में बदलने की कहानी है. अलब्बार वही शख्स हैं, जिनकी वजह से आज दुबई की बुर्ज खलीफ इमारत इतनी मशहूर है.
कभी लक्जरी, ब्रांड्स और गगनचुंबी इमारतों का शहर बनने से पहले दुबई एक छोटा-सा बंदरगाह था, जो व्यापार और समुद्री लहरों पर टिका था. 1956 में मोहम्मद अलब्बार का जन्म एक धौ (लकड़ी की नाव) चलाने वाले कप्तान के घर हुआ, जो खाड़ी देशों में खजूर और मोती का व्यापार करते थे. जीवन के शुरुआती दिनों में ही अलब्बार ने अपने पिता से सख्त मेहनत और अनुशासन का महत्व सीखा. बाद में उन्हें सरकार की तरफ से स्कॉलरशिप मिली और वे अमेरिका के सिएटल यूनिवर्सिटी पहुंचे, जहां उन्होंने बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की.
1981 में जब अलब्बार वापस दुबई लौटे, तब यह शहर बदलाव की दहलीज़ पर था. वह सिर्फ डिग्री लेकर नहीं लौटे थे. वे एक मकसद लेकर लौटे थे. बचपन में पिता के साथ जहाज़ के गोदामों पर काम करते हुए भी उन्होंने काफी कुछ सीखा था.
अलब्बार ने अपने करियर की शुरुआत यूएई के सेंट्रल बैंक से की. यहां उन्होंने सीखा कि अर्थव्यवस्था कैसे चलती है. उनकी समझ और दूरदर्शिता ने जल्द ही सबका ध्यान खींचा और वे दुबई डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक डेवलपमेंट के पहले डायरेक्टर जनरल बने.
यहीं उनकी मुलाकात हुई दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम से हुआ. वह एक ऐसे नेता से जो भविष्य की कल्पना करते थे. अलब्बार वही व्यक्ति थे जिन्होंने उस कल्पना को हकीकत में बदल दिया. दोनों की जोड़ी ने दुबई का नक्शा ही बदल दिया. आसमान को छूती इमारतें, विशाल मॉल और दुनिया की सबसे बड़ी फाउंटेन, यह सब उनकी साझेदारी का नतीजा थाय
1997 में जब मोहम्मद अलब्बार ने 'ईमार प्रॉपर्टीज़' की स्थापना की, तब कई लोग उनकी सोच पर हंसे. उस वक्त दुबई का रियल एस्टेट सेक्टर अभी आकार ले ही रहा था. लेकिन अलब्बार का मकसद केवल इमारतें बनाना नहीं था, वह विरासतें बना रहे थे.
सिर्फ एक दशक में ईमार ने रेगिस्तान को पहचान दिला दी. दुबई फाउंटेन, डाउनटाउन दुबई, द दुबई मॉल और बुर्ज़ खलीफा, ये सभी प्रोजेक्ट्स वैश्विक महत्व के प्रतीक बन गए. 2010 में जब बुर्ज़ खलीफा का उद्घाटन हुआ, पूरी दुनिया ने देखा कि दुबई ने नई ऊंचाइयां छू ली हैं. लेकिन अलब्बार के लिए यह केवल ऊंचाई की बात नहीं थी, बल्कि ये उनके नज़रिए की जीत थी.
आज ईमार प्रॉपर्टीज़ दुनिया की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में से एक है, जिसकी वैल्यू ₹4 लाख करोड़ से भी ज्यादा है. इसके बावजूद, अलब्बार आज भी उस धौ कप्तान के बेटे की सादगी को साथ लेकर चलते हैं. जहां अधिकतर लोग अपनी सफलता के बाद रुक जाते हैं, वहीं अलब्बार ने 2016 में एक नया कदम उठाया — Noon.com की शुरुआत की.
यह एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जिसे मिडिल ईस्ट में Amazon का एक दूसरा ऑप्शन माना जाता है बहुत से आलोचकों ने इसे अरबपति की सनक कहा. हर साम्राज्य की तरह, ईमार को भी मुश्किल वक्त का सामना करना पड़ा. भारत में उनके प्रोजेक्ट्स गुरुग्राम और हैदराबाद में कानूनी विवादों और देरी का सामना कर चुके हैं.
अब अलब्बार का अगला सपना है दुबई क्रीक टॉवर, जो बुर्ज़ खलीफा से भी ऊंचा होगा. यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि यह संकेत है कि दुबई की कहानी अभी खत्म नहीं हुई. यह लगातार नई ऊंचाइयों को छूने की कहानी है.