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Germany News Today: जर्मनी अपनी बेहतरीन कारें, बीयर, ऐतिहासिक महल, फुटबॉल, टेक्नोलॉजी और डेमोक्रेसी के लिए दुनिया भर में फेमस है. यूरोप के दूसरे देशों के मुकाबले जंग की मार झेल रहे मिडिल ईस्ट के देशों के लिए जर्मनी ने अपने घर के दरवाजे खोल दिए है. हालांकि, इजराइल के नरसंहार की तरफदारी करने पर हमेशा से जर्मनी की आलोचना होती रही है.
वहीं, अब जर्मनी एक मुस्लिम अधिकारी को कोर्ट से बरी होने पर फिर से सुर्खियों में हैं. जर्मनी की अदालत ने एक ऐसे अधिकारी के हक में अपना फैसला सुनाया और उसके साथ बगैर किसी भेदभाव के इंसाफ किया, जिसे सिर्फ अपनी मजहबी प्रथाओं और ग़ज़ा पर अपने विचारों का इजहार करने की जवह से सेना से निकाल दिया गया था.
जर्मनी की अदालत ने यूनुस एमरे यार को फिर से सेना में बहाल कर दिया. वह जर्मन सेना में तुर्क मूल के अधिकारी हैं. उन्हें शुक्रवार को जुमे की नमाज़ पढ़ने, हलाल खाना खाने और ग़ज़ा पर अपने विचार रखने की वजह से सेना से हटा दिया गया था. वहीं, अब अदालत ने कहा कि उनकी बर्खास्तगी गलत थी और उन्हें पूरा वेतन वापस दिया जाए.
यूनुस एमरे यार चार साल से जर्मन सेना में थे. वह जर्मनी सेना की खुफिया विभाग में तैनात थे और इस घटना के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. उन पर आरोप थे कि वे नियमित रूप से नमाज़ पढ़ते थे, हलाल खाना खाते थे, इज़राइल की ग़ज़ा में कार्रवाइयों को 'जनसंहार' कहते थे. इतना ही नहीं यूनुस एमरे पर तीरंदाजी क्लब से जुड़ने और उनके पिता की सियासी पार्टियों से जुड़ने को भी आरोपों में शामिल किया गया था.
इस मामले में सुनवाई की बाद म्यूनिख की अदालत ने कहा कि यूनुस एमरे यार के मजहबी काम और उनके विचार उनके कामों में रुकावट नहीं डालते हैं. अदालत ने आगे कहा कि ग़ज़ा को लेकर की गई यूनुस एमरे यार की टिप्पणी उनके अपने निजी विचार हैं और यह उनका व्यक्तिगत अधिकारों के अंदर आता है. इसलिए युनूस को सेना में दोबारा बहाल किया जाए और पूरा वेतन दिया जाए.
अदालत में यूनुस एमरे यार के वकील यालचिन टेकिनोग्लु ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को गलत तरीके से 'अल्ट्रानैशनलिस्ट, इस्लामिस्ट या एंटी-सेमिटिक' बताया गया. उन्होंने कहा, "जुमे की नमाज पढ़ना या हलाल खाना कोई इंतेहा पसंदी नहीं है. यह मजहबी आजादी का हिस्सा है. इन आरोपों को आधार बनाकर यूनुस को बर्खास्त करना गलत है." अदालत के आदेश के बाद यूनुस एमरे यार का रैंक और वेतन बहाल कर दिया गया, लेकिन जर्मन रक्षा मंत्रालय इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है.