Nobel Committee on Arrest of Narges Mohammadi: नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की गिरफ्तारी के खिलाफ पूरी दुनिया में ईरान के खिलाफ विरोध हो रहा है. नरगिस मोहम्मदी की गिरफ्तारी की नार्वेजियन नोबेल कमेटी ने कड़ी आलोचना की है और उनकी फौरन रिहाई की मांग की है. कमेटी ने इस मुद्दे पर वैश्विक समुदाय से तेहरान पर दबाव बनाने की गुहार लगाई.
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Iran Arrested Narges Mohammadi: ईरान सरकार ने शुक्रवार (12 दिसंबर) को मशहद शहर में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को गिरफ्तार कर लिया है. ईरान के इस कदम की पूरी दुनिया में आलोचना हो रही है. नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने ईरान सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की है. कमेटी ने इसे एक निर्मम गिरफ्तारी बताते हुए ईरानी अधिकारियों से तुरंत जवाब देने की मांग की है.
नोबेल कमेटी ने अपने बयान में कहा कि वह आज नरगिस मोहम्मदी और अन्य कई कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से बेहद चिंतित है. बयान के मुताबिक, नरगिस मोहम्मदी मानवाधिकारों, अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक भागीदारी की मजबूत समर्थक रही हैं. कमेटी ने कहा कि ईरान की सरकार तुरंत यह स्पष्ट करे कि नरगिस मोहम्मदी कहां हैं, उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करे और उन्हें बिना किसी शर्त के रिहा किया जाए.
'मेल खाती है नरगिस-कोरीना की गिरफ्तारी'
नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने यह भी कहा कि वह नरगिस मोहम्मदी और ईरान में शांतिपूर्ण तरीके से मानवाधिकारों, कानून के शासन और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए काम करने वाले सभी लोगों के साथ एकजुटता में खड़ी है. कमेटी ने अपने बयान में यह भी जिक्र किया कि ईरान और वेनेजुएला के बीच करीबी संबंधों को देखते हुए यह गिरफ्तारी ऐसे समय पर हुई है, जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है. कमेटी ने कहा कि ईरान और वेनेजुएला की सरकारों के बीच सहयोग को देखते हुए, नरगिस मोहम्मदी की गिरफ्तारी इस घटनाक्रम के साथ मेल खाती है.
नरगिस मोहम्मदी बनीं मजलूमों की आवाज
गौरतलब है कि 2023 का नोबेल शांति पुरस्कार ईरान की जेल में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को दिया गया था. महिलाओं के अधिकारों के लिए दो दशकों से ज्यादा समय तक संघर्ष करने वाली नरगिस मोहम्मदी ईरान में स्वतंत्रता की प्रतीक और ईरानी धार्मिक शासन के खिलाफ आंदोलन की एक अहम आवाज बन चुकी हैं.
साल 2003 में उन्होंने डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर से जुड़कर काम शुरू किया था, जिसकी स्थापना उसी साल की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी ने की थी. इसके बाद के वर्षों में नरगिस मोहम्मदी ने जेल में बंद कार्यकर्ताओं की मदद की, मृत्युदंड के खिलाफ अभियान चलाया और ईरानी शासन के जरिये यातना और यौन हिंसा की खुलकर आलोचना की.
बागी तेवर ने 13 पहुंचाया जेल
हालांकि, इस संघर्ष की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी. नरगिस मोहम्मदी को अब तक 13 बार गिरफ्तार किया गया है और उन्हें कुल 31 साल की जेल और 154 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है. अक्टूबर 2023 में जब उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई, उस समय वह तेहरान की कुख्यात एविन जेल में बंद थीं.
जेल में रहते हुए भी नरगिस मोहम्मदी ईरानी शासन के खिलाफ बड़े आंदोलनों की अगुवाई करती रहीं. 2022 की ठंडक में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों में वह सबसे आगे रहीं. यह विरोध उस समय भड़का था, जब एक नौजवान कुर्द महिला महसा जीना अमीनी को नैतिक पुलिस ने गिरफ्तार किया, उसके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई. उसका कथित अपराध यह था कि उसने अपने बाल सही ढंग से नहीं ढके थे.
'नोबेल ने मुझे ज्यादा मजबूत और दृढ़ बनाया'
इन प्रदर्शनों पर ईरानी अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई की. रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 500 से ज्यादा लोगों की मौत, हजारों लोग घायल हुए और कम से कम 20,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया. नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद नरगिस मोहम्मदी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था, "मैं लोकतंत्र, आजादी और समानता की स्थापना के लिए संघर्ष करना कभी नहीं छोड़ूंगी. निश्चित रूप से नोबेल शांति पुरस्कार मुझे और ज्याद मजबूत, दृढ़, आशावान और उत्साही बनाएगा."
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