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Narendra Modi Gulf Relations: पीएम नरेंद्र मोदी आज (17 सितंबर) 75 साल के हो गए हैं. वह अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस खास मौके पर देश और दुनियाभर के लीडर उन्हें मुबारकबाद दे रहे हैं. भारत का मुसलमान 2014 के बाद देश में CAA-NRC, और मुस्लिम समाज के खिलाफ बने रहे घृणा के माहौल और भाजपा नेताओं के नफरती भाषणों को लेकर प्रधानमंत्री से थोड़ा नाराज़ रहता है. मुस्लिम से जुड़ी सरकार की नीतियों को संदेह की दृष्टि से देखता है. इसके बावजूद आज अजमेर, दिल्ली के निजामुद्दीन सहित कई धार्मिक इदारों और संगठनों की तरफ से प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई देकर उनकी लंबी उम्र की दुआ मांगी गई.
निजी तौर पर भी लोगों ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाइयां दी. इसे देखकर ये बात कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि मोदी की लोकप्रियता मुस्लिम समाज में भी लगातार बढ़ रही है. भारतीय मुसलमानों के अलावा मुस्लिम मुल्क और अरब देशों के लीडर्स ने भी उन्हें जन्मदिन के मौके पर बधाई दी है. यह सिर्फ शिष्टाचार नहीं है, बल्कि भारत और मुस्लिम देशों (अरब देशों) के बीच लगातार बेहतर होते रिश्तों की झलक भी है.
नरेंद्र मोदी 2014 में PM बनने के बाद से मुस्लिम और अरब देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने पर लगातार काम कर रहे हैं. सऊदी अरब, UAE, बहरीन, ओमान और कुवैत जैसे देशों ने मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है. हाल ही में कुवैत ने उन्हें “The Order of Mubarak al-Kabir” से सम्मानित किया था. साथ ही ईरान और कई मुस्लिम मुल्कों के साथ भारत की नजदीकियां भी बढ़ी हैं. हाल ही में भारत ने कतर पर इजरायली हमले की निंदा की थी और कतर का समर्थन किया था. यह दिखाता है कि खाड़ी देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अहम और भरोसेमंद नेता मानते हैं, भले ही उनके अपने ही देश में कुछ मुसलमान उनकी नीतियों और बयानों को लेकर संदेह करते हों! मोदी सरकार की मुस्लिम समाज से जुड़ी कुछ नीतियों को देखकर विपक्ष यहां तक आरोप लगा चुका है कि मोदी भारतीय मुसलमानों से द्वेष और बाहरी अमीर मुसलमानों से प्रेम करते हैं! वहीं, ये भी सोलह आने सच है कि मुस्लिम मुल्कों के नेता भारत के मुसलमानों के किसी भी मामले में दखल नहीं देते हैं. CAA-NRC,कश्मीर से धरा 370 आधी हटाये जाने पर वो खामोश रहते हुए इसे भारत का आंतरिक मामला मानते हैं.

कुवैत और सऊदी से पीएम मोदी के हैं अच्छे रिश्ते
भारत और कुवैत के बीच संबंध सिर्फ तेल और गैस या व्यापार तक सीमित नहीं हैं. सुरक्षा सहयोग भी बढ़ रहा है. मोदी सरकार के दौरान खाड़ी देशों के साथ सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग में मजबूती आई है. खाड़ी देशों ने कई बार भारत के दृष्टिकोण को समर्थन दिया है. भारत की पाकिस्तान के साथ नजदीकी सऊदी अरब से भी अधिक बढ़ गई है. पहलगाम हमले से एक दिन पहले नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब का दौरा किया था. हालांकि, हमले की वजह से वह वापस लौट आए थे. इसके बावजूद भी सऊदी और भारत के बीच कई महत्वपूर्ण डील हुए.
UAE का है सबसे भरोसेमंद देश भारत
सुरक्षा दृष्टिकोण और मजबूत नेतृत्व ने खाड़ी देशों के शासकों को भारत ने प्रभावित किया है. 2014 के बाद इस रिश्ते को नई रफ्तार मिली है. मोदी और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद के बीच व्यक्तिगत रिश्ते भी अच्छे हैं. इससे दोनों देशों के साथ भारत के संबंध ऊर्जा, निवेश, सुरक्षा, तकनीक और प्रवासी भारतीयों के मुद्दों पर मजबूत हुए हैं.
ईरान से भी अच्छे संबंध
भारत और ईरान के रिश्ते ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से गहरे हैं. ईरान भारत के लिए पारंपरिक रूप से बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता रहा है, जबकि भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट को विकसित कर रणनीतिक और व्यापारिक पहुंच बढ़ाई. दोनों देश अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक संपर्क बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं. हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत को तेल खरीद कम करनी पड़ी, लेकिन वह ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा सहयोग में ईरान के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश जारी रखे हुए है.
पाकिस्तान के साथ खाड़ी देशों की दूरी
2015 में जब यमन युद्ध में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होने से पाकिस्तान ने इनकार कर दिया, तब सऊदी और दूसरे खाड़ी देशों ने भारत की तरफ रुख करना शुरू किया. मोदी ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और अरब देशों के साथ संबंधों को नए स्तर पर ले गए.
नेताओं के साथ रिश्ते बनाने में माहिर हैं नरेंद्र मोदी
पीएम नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत रूप से नेताओं के साथ रिश्ते बनाने में माहिर माने जाते हैं. सऊदी, यूएई और कुवैत के शासकों के साथ उनकी बैठकों और दौरे ने भरोसे को बढ़ाया. मोदी ने प्रवासी भारतीयों से भी लगातार संवाद किया, जिससे खाड़ी देशों के नेताओं के बीच उनकी छवि और मजबूत हुई.