Afghanistan Refugees Deported: अक्टूबर में ही पाकिस्तान ने अफगान शरणार्थियों को सात दिनों के अंदर वहां से जाने का आदेश दिया था. इस बीच पाकिस्तान और ईरान ने अफगान रिफ्यूजी को जबरन बाहर निकाल दिया है.
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Afghanistan Refugees Deported: पाकिस्तान और अफगानिस्तान तनाव के बीच एक ही दिन में ईरान और पाक सरकार ने 12,000 से ज्यादा अफगान रिफ्यूजी को जबरन वापस अफगानिस्तान भेज दिया है. यह जानकारी रविवार को स्थानीय मीडिया ने तालिबान के एक अधिकारी के हवाले से दी.
पझवोक अफगान न्यूज के मुताबिक तालिबान के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने कहा कि शनिवार को 2,098 परिवारों के 12,455 लोगों को ईरान और पाकिस्तान से अफगानिस्तान डिपोर्ट कर दिया गया. उन्होंने बताया कि अफगान शरणार्थी कंधार में स्पिन बोल्डक, हेलमंद में बहरामचा, नंगरहार में तोरखम क्रॉसिंग, हेरात में इस्लाम कला क्रॉसिंग और निमरोज में पुल-ए-अब रेशम के रास्ते अपने घर लौटे. लौटने वाले लोगों को उनके इलाकों में ले जाया गया, जबकि 2,051 लोगों को मानवीय सहायता दी गई. टेलीकम्युनिकेशन कंपनियों ने ईरान और पाकिस्तान से डिपोर्ट किए गए शरणार्थियों को 1,652 सिम कार्ड बांटे.
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच अक्टूबर के महीने से तनाव काफी बढ़ा हुआ है. स्थानीय मीडिया ने बताया कि अफगान शरणार्थियों ने पाकिस्तान में चल रही दमनकारी कार्रवाई के बीच बढ़ती चुनौतियों और अपने डर को लेकर पहले ही चिंता जाहिर की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी पुलिस ने हाल ही में कुछ मस्जिदों में घोषणाएं की हैं, जिसमें चेतावनी दी गई है कि जो भी पाकिस्तान में घरों या दुकानों को किराये पर देकर शरणार्थियों की मदद करेगा, उसे सरकार अपराधी मानेगी.
इससे पहले भी अफगानिस्तानियों को निकाला गया था बाहर
इससे पहले अक्टूबर में ही पाकिस्तान ने अफगान शरणार्थियों को सात दिनों के अंदर वहां से जाने का आदेश दिया था. स्थानीय मीडिया ने डिप्टी कमिश्नर मंसूर अहमद के हवाले से बताया कि जिन मकान मालिकों और दुकानदारों ने अफगानियों को अपनी संपत्तियां किराये पर दी हैं, उन्हें सात दिनों के भीतर खाली करने का निर्देश दिया गया.
पाकिस्तानी अधिकारियों ने दी चेतावनी
पाकिस्तानी अधिकारियों ने मकान मालिकों/संपत्ति मालिकों को चेतावनी दी है कि अगर वे आदेश का पालन नहीं करते हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जाएगा और उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा. यह आदेश उन अफगान प्रवासियों पर चल रही कार्रवाई से जुड़ा है जिनके पास पाकिस्तान में रहने के लिए कानूनी दस्तावेज नहीं हैं.
माइग्रेंट राइट्स एक्टिविस्ट ने क्या कहा?
माइग्रेंट राइट्स एक्टिविस्ट नजर नज़ारी ने कहा, "इस संकट का समाधान अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सरकारों के बीच डिप्लोमैटिक बातचीत में ही है, ऐसी बातचीत जिसका मकसद घरों को तोड़ने से रोकना और जबरदस्ती डिपोर्टेशन को रोकना है. साथ ही शेल्टर, खाना, हेल्थकेयर और नौकरी के मौके देने के लिए इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन के साथ कोऑर्डिनेशन जरूरी है.