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Zee SalaamMuslim Worldबलूचिस्तान में विरोध की आवाज़ क्यों दबाई जा रही है? जानें पाबंदियों की पूरी कहानी

बलूचिस्तान में विरोध की आवाज़ क्यों दबाई जा रही है? जानें पाबंदियों की पूरी कहानी

Balochistan News: बलूचिस्तान सरकार ने धारा 144 का तीसरी बार विस्तार कर दिया है. इसके तहत सभाएं, रैलियां और पांच से ज्यादा लोगों का जुटना बैन है. मोबाइल इंटरनेट और ट्रेन सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं. 

बलूचिस्तान में विरोध की आवाज़ क्यों दबाई जा रही है? जानें पाबंदियों की पूरी कहानी

Balochistan News: बलूचिस्तान सरकार के हालिया फैसलों ने एक बार फिर लोगों में गुस्सा और चिंता पैदा कर दी है. सरकार ने धारा 144 को बढ़ा दिया है, मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और ट्रेन सेवाओं को भी रोक दिया है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ये कदम सुरक्षा के नाम पर नहीं बल्कि लोगों की बुनियादी आज़ादियों को खत्म करने की कोशिश हैं.

दरअसल, 1 अगस्त को बलूचिस्तान में धारा 144 लगाई गई थी. शुरुआत में इसे अस्थायी कदम बताया गया था, लेकिन अब इसे तीसरी बार बढ़ाया जा चुका है. नए आदेश के मुताबिक 14 सितंबर तक पाबंदियां जारी रहेंगी. इस दौरान पांच से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने, धरना-प्रदर्शन, रैली और जुलूस पर रोक होगी. यहां तक कि किसी को सार्वजनिक जगह पर मास्क या मफलर पहनने की भी इजाज़त नहीं होगी.

इस आदेश ने सीधे-सीधे लोगों के विरोध करने और अपनी बात रखने के अधिकार को छीन लिया है. पाकिस्तान का संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की आज़ादी और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने का हक देता है लेकिन धारा 144 के लगातार विस्तार ने इन अधिकारों पर ताला लगा दिया है.

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इंटरनेट बंद और ट्रेन रोकी गई
सबसे बड़ा असर मोबाइल इंटरनेट पर पड़ा है. क्वेटा समेत पूरे बलूचिस्तान में बार-बार इंटरनेट बंद किया जा रहा है. जबकि हाईकोर्ट ने सेवाएं बहाल करने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार ने दोबारा इन्हें ठप कर दिया. इंटरनेट बंद होने से छात्रों, कारोबारियों, पत्रकारों और आम परिवारों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं. इसके अलावा ट्रेन सेवाओं पर भी रोक लगाई गई। पेशावर से क्वेटा जाने वाली जाफ़र एक्सप्रेस को जैकबाबाद में रोक दिया गया. इससे यात्रियों को अचानक वैकल्पिक साधन ढूंढने पड़े. सफर कर रहे लोग रास्ते में फंस गए और उन्हें असुरक्षित हालात में सफर करना पड़ा.

आलोचना क्यों हो रही है?
मानवाधिकार संगठनों और समाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये सारे कदम जनता में डर पैदा करने और उनकी आवाज दबाने के लिए उठाए जा रहे हैं. दि बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इन आदेशों से साफ झलकता है कि सरकार को अपने ही नागरिकों पर भरोसा नहीं है. लोगों का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में सुरक्षा बहाल करना चाहती, तो उसे समस्याओं की जड़ तक पहुंचना चाहिए लेकिन इसके बजाय सरकार ने जनता को ही निशाना बना लिया है. धारा 144 इंटरनेट बंदी और ट्रेन सेवाएं रोकना समाधान नहीं बल्कि नए संकट खड़े करने जैसा है.

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