Balochistan News: पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, जबरन गायब किए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे BYC नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई के एक दिन बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.
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Balochistan News: पाकिस्तान के क्वेटा में मौजूद एक आतंकवाद-रोधी अदालत (ATC) ने गुरुवार को पुलिस के अनुरोध पर बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) की प्रमुख महरंग बलूच और समूह के अन्य आयोजकों की रिमांड 15 दिनों के लिए बढ़ा दी. स्थानीय मीडिया ने उनके वकील के हवाले से यह जानकारी दी.
वकील इसरार बलूच ने बताया कि बीवाईसी के गिरफ्तार नेताओं को क्वेटा एटीसी-1 के न्यायाधीश मुहम्मद अली मुबीन के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने पुलिस के अनुरोध पर उनकी पुलिस हिरासत 15 दिनों के लिए और बढ़ा दी. बलूच ने आगे बताया कि सिबगतुल्लाह शाहजी, बेबो बलूच, गुलज़ादी और बेबर्ग बलूच को भी अदालत में पेश किया गया. महरंग बलूच और बीवाईसी के दूसरे सदस्यों को 22 मार्च को क्वेटा सिविल अस्पताल पर हमला करने और लोगों को हिंसा के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.
पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, जबरन गायब किए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे BYC नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई के एक दिन बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. BYC प्रमुख को लोक व्यवस्था बनाए रखने (MPO) की धारा 3 के तहत गिरफ़्तार किया गया था. यह एक ऐसा क़ानून है जो अधिकारियों को लोक व्यवस्था के लिए ख़तरा बनने के संदेह में लोगों को गिरफ़्तार करने और हिरासत में रखने का अधिकार देता है. यह अवधि 30 दिनों (पहली अवधि) के लिए होती है. बाद में अप्रैल में, बलूचिस्तान गृह विभाग ने उनकी नज़रबंदी अवधि को 30 दिनों (दूसरी अवधि) के लिए और बढ़ा दिया. प्रांतीय सरकार ने जून में BYC नेताओं की नज़रबंदी के तीन महीने पूरे होने के बाद चौथा विस्तार आदेश जारी किया.
MPO के तहत उनकी गिरफ़्तारी के बाद, महरंग बलूच और अन्य BYC नेताओं के ख़िलाफ़ आतंकवाद विरोधी अधिनियम और पाकिस्तान दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए. हिरासत में रहने के दौरान BYC नेताओं की रिमांड कई बार बढ़ाई गई है. इस हफ़्ते की शुरुआत में, बीवाईसी ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर नेताओं को हिरासत में रखने के लिए लोक व्यवस्था बनाए रखने (एमपीओ) कानून का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था, जहां अदालतें अक्सर पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधी विभाग (सीटीडी) से जवाबदेही मांगे बिना रिमांड बढ़ाने की मंज़ूरी दे देती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वकीलों ने बार-बार रिमांड रिपोर्ट मांगी, लेकिन अदालतों में सीटीडी का सामना करने का साहस नहीं है.
मानवाधिकार समूह ने कहा कि पिछले दो सालों में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों और वीडियो बयानों के लिए उसके नेताओं के ख़िलाफ़ कई मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन केवल तीन मामलों का ही निपटारा हुआ है और 30 से ज़्यादा मामले अभी भी लंबित हैं. बीवाईसी ने हाल ही में हुई एक सुनवाई में महरंग बलूच और अन्य बीवाईसी नेताओं को पांच दिन की और रिमांड देने के लिए अदालत की आलोचना की, जबकि पहले आश्वासन दिया गया था कि आगे कोई और रिमांड नहीं दी जाएगी.
इनपुट-आईएएनएस