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Pakistan News Today: पाकिस्तान के मशहूर इस्लामिक स्कालर और आलिमे दीन इंजीनियर मोहम्मद अली मिर्ज़ा को पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया है. मोहम्मद अली मिर्ज़ा को 'पब्लिक ऑर्डर बिगाड़ने' के आरोप में हिरासत में लिया गया है. उनका यह मामला अब पाकिस्तान की राजनीति और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है.
मिली जानकारी के मुताबिक, मोहम्मद अली मिर्ज़ा को जेहलम डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर 'मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर'(MPO) Ordinance की धारा-3 के तहत हिरासत में लिया गया है. पुलिस अधिकारियों के जरिये इंजीनियर मिर्ज़ा की सरगर्मियों की वजह से कानून-व्यवस्था बिगड़ने और पब्लिक सेफ्टी को खतरा होने की आशंका जताई गई थी. इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है.
गिरफ्तारी के बाद स्थानीय प्रशासन ने उनकी निजी अकादमी को भी सील कर दिया, जहां वह नियमित रुप से इस्लामिक लेक्चर में हिस्सा और मजहब से जुड़े मुद्दों पर चर्चाएं करते थे. पुलिस ने पुष्टि की है कि उन्हें 30 दिनों के लिए जेल भेजा गया है. यानी, अगले एक महीने तक वह हिरासत में रहेंगे. खास बात यह है कि यह गिरफ्तारी प्रिवेंटिव (एहतियाती) तौर पर की गई है, न कि किसी दर्ज एफआईआर या आपराधिक केस के तहत की गई है.
मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इंजीनियर मोहम्मद अली मिर्ज़ा को MPO की धारा-3 के तहत हिरासत में लिया गया है. इस कानून के तहत पाकिस्तान के प्रशासन को यह अधिकार है कि अगर किसी शख्स के सरगर्मियों की वजह से शांति-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हो, तो बगैर आरोप के भी उसे हिरासत में लिया जा सकता है.
मिर्जा पर आरोप है कि उन्होंने कई बार अपने व्याख्यानों और वीडियो में अलग-अलग संप्रदायों के प्रमुख स्कालर्स के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया. उन्होंने रिवायती अकीदों पर सवाल उठाते हुए दाढ़ी को सुन्नत और दीन का हिस्सा मानने से इनकार किया और संगीत को जायज ठहराया. उनके ये विचार पाकिस्तान में प्रचलित धार्मिक धारणाओं से बिल्कुल उलट हैं.
विवाद तब और गहरा गया जब एक वायरल वीडियो में मिर्जा ने कथित तौर पर एक धर्मगुरु की कत्ल की बात कही. हालांकि उन्होंने सफाई दी कि उनकी बात को संदर्भ से हटकर पेश किया गया, लेकिन धार्मिक संगठनों ने इसे गंभीर आरोप माना. इसके अलावा भारत में नूपुर शर्मा के जरिये पैगंबर मुहम्मद सल्ललाहु अलैही व सल्लम पर दिए गए विवादित बयान का समर्थन करने पर भी मिर्जा की तीखी आलोचना हुई थी.
धार्मिक गुटों का कहना है कि मिर्जा के विचार समाज में मतभेद और धार्मिक टकराव को बढ़ावा देते हैं. इन्हीं बयानों और विवादों के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई हुई है और वे लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. खबर है कि गिरफ्तारी से पहले कुछ मजहबी पार्टियों के नेताओं ने पुलिस और प्रशासन से मुलाकात की थी. माना जा रहा है कि इसी दबाव के चलते मिर्ज़ा के खिलाफ यह कदम उठाया गया.
गौरतलब है कि इंजीनियर मोहम्मद अली मिर्ज़ा पाकिस्तान और भारत दोनों जगह मुस्लिम नौजवानों के बीच काफी मकबूल हैं. वह मजहबी मामलों पर अपने विवादित लेकिन तथ्यात्मक नजरिए के लिए जाने जाते हैं. सोशल मीडिया पर उनकी लंबी फैन फॉलोइंग है. फिलहाल, उनकी गिरफ्तारी ने पाकिस्तान के मजहबी हलकों और सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. समर्थक इसे मजहबी आजादी पर हमला बता रहे हैं, तो विरोधी इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं.