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Asim Munir Nuclear Control: पाकिस्तान में चुनावों में धांधली हुई थी. इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग के कई अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया. इन आरोपों के बीच, पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर गंभीर चुनावी गड़बड़ी का आरोप लगा है. रिपोर्ट्स का दावा है कि आसिम मुनीर के कहने पर पाकिस्तानी सेना ने चुनावों में धांधली की. रिपोर्ट के मुताबिक, सेना ने देश की बड़ी राजनीतिक पार्टी PTI के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है.
PTI के नेता और पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान अभी भी जेल में बंद हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना ने सत्ता अपने हाथ में रखने के लिए चुनावों को प्रभावित किया और विरोधी नेताओं पर दबाव बनाया. इसमें यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान के संविधान में नया 27वां संशोधन फील्ड मार्शल मुनीर को सत्ता में पांच साल का अतिरिक्त समय देता है, जिससे उन्हें देश के न्यूक्लियर हथियारों पर पूरा कंट्रोल मिलता है और उन्हें आजीवन मुकदमे से छूट मिलती है, इस तरह देश सीधे मिलिट्री शासन की ओर बढ़ रहा है.
अमेरिकी न्यूज़ आउटलेट 'द क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब फील्ड मार्शल मुनीर ने गुरुवार को पाकिस्तान के पहले "चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज" के रूप में अपना नया पद संभाला, तो उन्होंने देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में अपनी स्थिति को प्रभावी ढंग से मजबूत कर लिया. इसमें बताया गया, "इस महीने पार्लियामेंट द्वारा एक कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट पास करने के बाद यह नई जॉब बनाई गई, जो फील्ड मार्शल मुनीर को पाकिस्तान की नेवी और एयर फोर्स का भी कंट्रोल देता है और उन्हें केस से लाइफटाइम इम्युनिटी देता है. लेकिन हालांकि यह टाइटल नया है, लेकिन ऐसा लगता है कि इतिहास खुद को दोहरा रहा है.
मिलिट्री शासन के बीच झूलता पाकिस्तान
1947 में आज़ादी मिलने के बाद से पाकिस्तान सिविल और मिलिट्री शासन के बीच झूलता रहा है. देश के 78 साल के इतिहास में 33 साल तक मिलिट्री डिक्टेटर ने सीधे राज किया है. बाकी 45 सालों में मिलिट्री ने सरकारें बनाकर और तोड़कर और नेताओं को मैनिपुलेट करके, छिपकर अपना असर डाला है." रिपोर्ट में ज़ोर दिया गया कि 2013 के जनरल इलेक्शन में पाकिस्तान में पहली बार एक चुनी हुई सिविलियन सरकार से दूसरी चुनी हुई सिविलियन सरकार को पावर ट्रांसफर हुआ. जब 2018 में देश में एक बार फिर चुनाव हुए, तब तक पाकिस्तानी पार्लियामेंट ने लगातार दो टर्म पूरे कर लिए थे, जो एक और बड़ी बात थी.
कंट्रोल के लिए किया गया ये काम
रिपोर्ट में कहा गया है, "अपने दबदबे वाले कंट्रोल को मिली इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए मिलिट्री ने इमरान खान को तीसरे रास्ते के उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ाना शुरू किया और उसी चुनाव में उन्हें सत्ता में ले आई. खान, जो एक मशहूर क्रिकेटर से समाजसेवी बने, ने भ्रष्टाचार के उस चक्र को तोड़ने के लिए कैंपेन चलाया, जिसके बारे में उनका दावा था कि इसे PMLN और PPP ने पाकिस्तान पर थोपा था."
अमेरिकी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
अमेरिकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल के पूर्व जाने-माने फेलो शुजा नवाज ने तर्क दिया कि मिलिट्री के सपोर्ट के बिना, इमरान खान, "वे सीटें नहीं जीत पाते जिनसे वे प्रधानमंत्री बने."
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद "हाइब्रिड शासन" में, जो खान के कार्यकाल के लिए मीडिया द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, लोकतांत्रिक नियम एक बार फिर खत्म हो गए और जब खान की सरकार और आर्मी के बीच तनाव फिर से शुरू हुआ, तो आर्मी ने अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए उन्हें हटाने की योजना बनाई. दूसरी ओर, पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए, इतिहासकार आयशा जलाल ने कहा, "हम अभी जो देख रहे हैं वह एक ऐसी मिलिट्री है, जो मज़बूत रही है, और भी मज़बूत होती जा रही है."
इनपुट-आईएएनएस