Pakistan News: 250 मिलियन की आबादी वाले पाकिस्तान में लगभग पाँच लाख अहमदिया हैं. अहमदिया धर्म इस्लाम की एक शाखा है, लेकिन पाकिस्तान ने 1974 में अहमदिया को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया.
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Pakistan News: पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों के खिलाफ लगातार अत्याचार हो रहे हैं. इस बीच 18 अप्रैल को एक ऐसी खबर आई, जिसने सबको हिलाकर रख दिया. दरअसल, अहमदिया मुस्लिम समुदाय के एक शख्स ने कराची के एक मस्जिद के पास प्रोटेस्ट कर रहा था. इसी दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने एक अहमदिया मुसलमान को कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी. पुलिस ने कहा कि वे हत्या की जांच कर रहे हैं.
अहमदी समुदाय के प्रवक्ता आमिर महमूद ने कहा कि पीड़ित की पहचान लईक चीमा के रूप में हुई है. दक्षिणी बंदरगाह शहर के एक अस्पताल इलाज के दौरान पीड़ित की मौत हो गई. सरकारी सिविल अस्पताल के प्रवक्ता सुम्मैया तारिक ने चीमा की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें कई चोटें आई हैं. वहीं, अहमदी समुदाय के प्रवक्ता महमूद ने इस हमले के लिए तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान या टीएलपी के लोगों की भीड़ को दोषी ठहराया और कहा कि उन्होंने अहमदी मस्जिद के बाहर रैली की और इसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की.
अधिकारी ने क्या कहा?
कराची के सीनियर पुलिस अधिकारी असद रजा ने स्थानीय मीडिया आउटलेट्स को बताया कि उन्होंने टीएलपी रैली से पहले शहर में किसी भी तरह की अशांति से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस तैनात की थी. उन्होंने कहा कि चीमा की हत्या अहमदी पूजा स्थल से दूर की गई, और पुलिस अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उन पर किसने हमला किया.
पाकिस्तान ने 1974 में अहमदिया को घोषित किया गैर-मुस्लिम
अहमदी समुदाय के प्रवक्ता महमूद ने कहा कि कराची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों द्वारा घेर लिए जाने के बाद समुदाय के सदस्यों को मस्जिद से बचाया, लेकिन उन्होंने यह भी शिकायत की कि पुलिस देश भर में टीएलपी के विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ कार्रवाई करने में धीमी रही है. 250 मिलियन की आबादी वाले पाकिस्तान में लगभग पाँच लाख अहमदिया हैं. अहमदिया धर्म इस्लाम की एक शाखा है, लेकिन पाकिस्तान ने 1974 में अहमदिया को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया. अहमदिया घरों और पूजा स्थलों को अक्सर सुन्नी आतंकवादियों द्वारा निशाना बनाया जाता है, जो उन्हें विधर्मी मानते हैं.
इस्लाम का अपमान करना पड़ सकता है महंगा
महमूद ने एसोसिएटेड प्रेस के साथ जो वीडियो फुटेज शेयर की, उसमें भीड़ पूजा स्थल के बाहर अहमदिया विरोधी नारे लगाती हुई दिखाई दे रही थी. उन्होंने कहा कि टीएलपी समर्थक हर शुक्रवार को इस तरह के विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और पुलिस ने पिछले हफ्तों में कोई कार्रवाई नहीं की है. टीएलपी हाल के सालों में प्रदर्शनों का आयोजन करके प्रमुखता से उभरी है, और पाकिस्तान के विवादास्पद ईशनिंदा कानूनों का समर्थन करने के लिए जानी जाती है, जिसमें इस्लाम का अपमान करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए सजा-ए-मौत का प्रावधान है.