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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हालात बेकाबू, मानवाधिकार आयोग ने जताई गहरी चिंता

Pakistan News: खैबर पख्तूनख्वा में बीते कुछ समय से लगातार इस तरह की खबरें मीडिया में आ रही हैं कि वहां रहने वाले परिवार से लोगों को जबरन पुलिस या सेना उठाकर ले जाते हैं और फिर वो लापता हो जाते हैं या उनकी हत्या कर दी जाती है.

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हालात बेकाबू, मानवाधिकार आयोग ने जताई गहरी चिंता

Pakistan News: पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लगातार स्थिति बिगड़ती जा रही है. पाकिस्तानी सैनिकों का अत्याचार बढ़ता जा रहा है. इस बीच पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ती सुरक्षा और मानवाधिकार स्थिति पर चिंता व्यक्त की है. एचआरसीपी ने बताया कि जिस तरह से वहां के हालात हैं, उसकी वजह से उस प्रांत में रहने वाले लोगों के मन में किस तरह का डर समाया हुआ है.

खैबर पख्तूनख्वा में अराजकता की स्थिति बनी हुई है. इस बीच पाकिस्तानी मीडिया द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, एचआरसीपी ने कहा है कि 2025 में पाकिस्तान में दर्ज किए गए सभी हमलों में से लगभग दो-तिहाई खैबर पख्तूनख्वा में हुए. इनमें मुख्य रूप से सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निशाना बनाया गया. वहीं पाकिस्तानी मीडिया ने इस रिपोर्ट को हेडलाइन 'क्रॉसफायर में फंसे' के साथ पब्लिश किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा का केंद्र विलय किए गए जिले थे. यहां रहने वाले लोग असुरक्षा, जबरन विस्थापन और न्याय तक सीमित पहुंच जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं. 

गौरतलब है कि बीते कुछ समय से लगातार इस तरह की खबरें मीडिया में आ रही हैं कि वहां रहने वाले परिवार से लोगों को जबरन पुलिस या सेना उठाकर ले जाते हैं और फिर वो लापता हो जाते हैं या उनकी हत्या कर दी जाती है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, एचआरसीपी ने खुलासा किया है कि वहां रहने वाले प्रभावित समुदाय के लोगों का कहना है कि लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया जा रहा है, कार्रवाई (नागरिक शक्ति की सहायता में) अध्यादेश, 2019 के तहत स्थापित नजरबंदी केंद्र अभी भी चल रहे हैं, और जबरन गायब होने की घटनाएं लगातार हो रही हैं.

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रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि यहां की स्थिति को उजागर करने के लिए रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं. पत्रकारों को सेंसरशिप, धमकियों और लक्षित हमलों का सामना करना पड़ता है. आदिवासी बुजुर्गों, राजनीतिक समर्थकों और शांति के पैरोकारों को भी हमलों का सामना करना पड़ रहा है. इससे लोगों में असुरक्षा और अविश्वास की गहरी भावना पैदा हुई है.

खैबर पख्तूनख्वा की खार तहसील के तंगी इलाके में अज्ञात हमलावरों ने 8 नवंबर को एक चौकी को निशाना बनाया. इस घटना में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया. एक अधिकारी ने बताया कि घायल पुलिसकर्मी की पहचान आजाद खान के रूप में हुई. किसी अज्ञात स्थान से हुई गोलीबारी में वह घायल हो गया था.

इनपुट-आईएएनएस

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