)
Pakistan News Today: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान इस समय बेरोजगारी, महंगाई, आतंकवाद समेत कई मुद्दों से परेशान है. कथित लोकतंत्र के नाम पर सेना की दखलंदाजी अक्सर देखने को मिलता है. एक हालिया रिपोर्ट में पाकिस्तान के आंतरिक और बाहरी मामलों में सेना की दखलंदाजी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.
शनिवार (26 अक्टूबर) को जारी रिपोर्ट में बताया गया हैं कि पाकिस्तान की सेना का भ्रम न सिर्फ बाहरी दृष्टि से खतरा पैदा करता है बल्कि आंतरिक तौर पर भी देश के लिए नुकसानदेह है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरलों की शान-शौकत और अहंकार ने उन्हें समाज की वास्तविक स्थिति से बेपरवाह कर दिया है.
इंडिया नैरेटिव की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि असीम मुनीर का फील्ड मार्शल बनना, उनका राजनीतिक और संस्थागत परिदृश्य पर दबदबा राष्ट्रीय ताकत का पुनर्जागरण नहीं बल्कि किसी बीमारी के समान है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना खुद पर घमंड करती है और बड़प्पन के भ्रम में रहती है, जिससे देश की स्थिरता और प्रगति बार-बार प्रभावित होती रही है.
रिपोर्ट में पूर्व सेना प्रमुख अयूब खान, जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ के उदाहरण दिए गए हैं. कहा गया है कि मुनीर भी सेना के इस विश्वास को दर्शाते हैं कि देश की मुक्ति लोकतंत्र या विकास से नहीं, बल्कि सेना के सुझाए राष्ट्रवाद में है. इसमें सैनिक को नागरिक से ऊपर और व्यावहारिकता से ऊपर डर को महत्व दिया जाता है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले पचहत्तर सालों से पाकिस्तान के जनरलों ने खुद को कमजोर राज्य का रक्षक साबित करने की कोशिश की है. अयूब खान के तख्तापलट, जिया का इस्लामीकरण और मुशर्रफ का 'प्रबुद्ध संयम' हर बार देश को कमजोर, गरीब और अधिक आक्रामक बनाते रहे.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय गौरव और इस्लामी दृढ़ता की बयानबाजी के पीछे असली सत्ता रावलपिंडी के जनरल हेडक्वार्टर के खाकी पर्दे के पीछे है. मुनीर की बनाई हुई छवि एक धर्मनिष्ठ जनरल की है, जो कुरान याद करते हैं और नैतिक संरक्षक के रूप में दिखते हैं. हालांकि, यह छवि यह छुपाती है कि पाकिस्तान के जनरल बार-बार व्यक्तिगत अधिकार को राज्य की ताकत मानते रहे हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस विचारधारा में लिपटे अधिनायकवाद का अंतहीन चक्र राजनीतिक ठहराव और आर्थिक बर्बादी पैदा करता रहा है. मुनीर के तहत पाकिस्तान का गणतंत्र नाम मात्र का है, जबकि वास्तविकता में यह एक छावनी बन चुका है. सरकार केवल सेना की इच्छा का प्रशासनिक विस्तार है, न्यायपालिका "राष्ट्रीय सुरक्षा" के दबाव में झुकती है, और मीडिया लगातार घेराबंदी में रहता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुनीर की हालिया चालें, जिसमें 2035 तक सत्ता में बने रहने के लिए दस साल का एक्सटेंशन प्लान शामिल है, यह दर्शाती हैं कि सेना का मानना है कि पाकिस्तान की मुक्ति संवैधानिक जवाबदेही के बजाय कमांड की निरंतरता में है. रिपोर्ट में निष्कर्ष यह निकाला गया कि जब तक पाकिस्तान के नागरिक सेना से अपनी संप्रभुता वापस नहीं लेते, तब तक देश मिलिट्री के घमंड का दुखद थिएटर बना रहेगा.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल साम्राज्य के सपने देखते हैं, जबकि देश कर्ज, निराशा और बर्बादी के बोझ तले दबा रहता है. मुनीर का शासन, फील्ड मार्शल की शान के बावजूद जीत के लिए नहीं बल्कि खोए हुए मौकों के लिए याद किया जाएगा. यह पाकिस्तान के सबसे लंबे और सबसे विनाशकारी भ्रम की निरंतरता है कि मुक्ति वर्दी पहनने में है.