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Pakistan News: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पाक सेना के एक जवान ने स्टूडेंट हयात बलूच को उसके माता-पिता के सामने ही हत्या कर दी थी. इस मामले में फ्रंटियर कॉर्प्स के सैनिक शदीउल्लाह की मौत की सज़ा दी गई थी. लेकिन आज पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने अपना ही फैसला पलट दिया. कोर्ट ने एक सैनिक की मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया. सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने दो-एक के बहुमत से शदीउल्लाह की मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया.
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कराची यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट हयात बलूच की 13 अगस्त 2020 को तुर्बत के अबसार इलाके में हत्या कर दी गई थी. एफसी के जवान शदीउल्लाह ने उसके माता-पिता के सामने उसे आठ गोलियां मारी थीं. हयात बलूच की नृशंस हत्या ने बलूचिस्तान में राज्य के दमन के खिलाफ आक्रोश पैदा कर दिया, जो आज भी इस क्षेत्र में विभिन्न रूपों में जारी है. बलूचिस्तान में कई विरोध प्रदर्शनों और यदा-कदा न्यायिक हस्तक्षेपों के बावजूद राजनीतिक कार्यकर्ताओं की न्यायेतर हत्याएं और जबरन गुमशुदगी की घटनाएं रुकी नहीं हैं.
द बलूचिस्तान पोस्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जिस समय हयात बलूच की हत्या हुई थी, उसी दौरान सैकड़ों युवा बलूच पुरुषों की हत्या कर दी गई थी, जिसे अधिकारी मुठभेड़ कहते हैं. बलूच युवाओं का अपहरण कर उनकी हत्या करने और फिर उनके शवों को वीरान इलाकों में फेंकने की यह प्रथा आज भी जारी है. अधिकारी, धमकी और बल प्रयोग के ज़रिए, राज्य द्वारा की जा रही ऐसी हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को चुप कराते रहते हैं.
रिपोर्ट में संगीन इल्जाम
रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत में सुनाए गए फैसले बलूचिस्तान में ज़मीनी स्तर पर शायद ही कभी न्याय में तब्दील होते हैं. शक्तिशाली संस्थाएं हथियारों के बल पर बलूच लोगों पर अपनी इच्छा थोपती रही हैं. न्यायिक न्याय के अभाव के बावजूद, लोग बलूचिस्तान में हयात बलूच और अनगिनत अन्य लोगों के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे. 23 अक्टूबर को एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कहा कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड द्वारा कम से कम दो बलूच युवाओं की न्यायेतर हत्या कर दी गई.
मानवाधिकार ने क्या कहा?
मानवाधिकार संस्था बलूच यकजेहती समिति ने बताया कि पंजगुर जिले के पारूम क्षेत्र के निवासी और 20 साल के मजदूर ज़हूर बलूच का 20 अक्टूबर की तड़के एक सरकारी समर्थित मौत के दस्ते ने जबरन अपहरण कर लिया. चश्मदीदों का हवाला देते हुए, मानवाधिकार संस्था ने बताया कि अपहरणकर्ता एक सर्फ वाहन में आए और ज़हूर को उसके घर से ले गए. अगली सुबह उसका क्षत-विक्षत शव मिला, जिससे उसकी न्यायेतर हत्या की पुष्टि हुई.
पाक फौज ले रही है लोगों की जान
बीवाईसी ने कहा, "यह दुखद घटना कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि बलूच आबादी को निशाना बनाकर जबरन गायब करने और न्यायेतर हत्याओं के एक व्यवस्थित अभियान का हिस्सा है. ज़हूर की मौत बलूचिस्तान में लगातार व्याप्त भय के माहौल को दर्शाती है, जहां युवाओं का नियमित रूप से अपहरण किया जाता है और उन्हें बेरोकटोक मार दिया जाता है."