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Zee SalaamMuslim Worldपाकिस्तानी मीडिया में महिलाओं की आवाज हुई कमजोर! टीवी न्यूज से महिला रिपोर्टर गायब

पाकिस्तानी मीडिया में महिलाओं की आवाज हुई कमजोर! टीवी न्यूज से महिला रिपोर्टर गायब

Female Journalists in Pakistan: एक अध्ययन में पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर महिला पत्रकारों की हिस्सेदारी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हालिया सालों में पाकिस्तान में महिला पत्रकारों की संख्या तेजी से घटी है. न्यूज कवरेज में महिलाएं न के बराबर दिख रही हैं और जेंडर-बेस्ड वायलेंस जैसे मुद्दे भी लगभग उपेक्षित रहे, जिससे मीडिया में लिंग असमानता का संकट गहराता दिखाई पड़ रहा है. 

 

प्रतीकात्मक एआई तस्वीर
प्रतीकात्मक एआई तस्वीर

Pakistan News Today: पाकिस्तान के मीडिया सेक्टर में महिलाओं की मौजूदगी लगातार घट रही है और यह स्थिति देश में कार्यस्थल पर जेंडर इनइक्वालिटी की गंभीर चुनौती को सामने लाती है. एक ताजा अध्ययन में पाया गया है कि टीवी चैनलों पर महिला रिपोर्टरों की संख्या बीते सालों की तुलना में बेहद कम रह गई है.

ग्लोबल मीडिया मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट (GMPP) की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर महिला रिपोर्टरों की भागीदारी लगभग 16 फीसदी थी. लेकिन अब यह आंकड़ा तेजी से गिरकर केवल 4 फीसदी पर पहुंच गया है. यह बदलाव मीडिया स्पेस में महिलाओं की आवाज को कमजोर होते दिखाता है.

इस रिपोर्ट को पाकिस्तान स्थित एनजीओ यूकेएस रिसर्च सेंटर ने बुधवार (10 दिसंबर) को सार्वजनिक किया. यह वही संगठन है जो जीएमएमपी के साथ मिलकर पाकिस्तान के आंकड़ों की मॉनिटरिंग करता है. जीएमएमपी हर पांच साल में एक बार वैश्विक स्तर पर मीडिया रिपोर्टिंग और जेंडर प्रतिनिधित्व का आंकलन करता है. इस साल यह मॉनिटरिंग चौथी बार की गई है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, जीएमएमपी 2025 को 6 मई 2025 को दुनिया भर में एक ही दिन के न्यूज कंटेंट का विश्लेषण किया गया. उस दिन पाकिस्तान की खबरों में मुख्य फोकस भारत-पाक तनाव और जंग जैसे हालात पर था. इसी वजह से टीवी और डिजिटल मीडिया का बड़ा हिस्सा सियासी बयानबाजी और सैन्य आंकलन पर फोकस्ड रहा. रिपोर्ट में कहा गया, "6 मई को टीवी, रेडियो और इंटरनेट न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर एक भी महिला रिपोर्टर नजर नहीं आई."

जेंडर असमानता का यह असर सिर्फ रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं रहा है. महिलाओं से जुड़े मुद्दों, खासकर जेंडर-बेस्ड वायलेंस (GBV) पर कवरेज बेहद कम पाई गई. बयान में बताया गया कि, "मॉनिटरिंग वाले दिन जांचे गए सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर GBV की सिर्फ एक खबर दिखाई दी." उस खबर में भी महिला को सिर्फ पीड़ित के रूप में ही दिखाया गया था, जबकि मानवाधिकार या कानूनी परिप्रेक्ष्य को ध्यान में नहीं रखा गया.

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि इस साल न्यूज सब्जेक्ट्स में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ 13 फीसदी रही, जो साल 2020 के 18 फीसदी की तुलना में कम है. विशेष बात यह पाई गई कि जहां-जहां महिलाएं न्यूज की मुख्य विषय थीं, उन खबरों को भी पुरुष पत्रकारों ने ही कवर किया. रिपोर्ट के अनुसार ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि पाकिस्तान के मीडिया संगठनों की संपादकीय नीतियां और न्यूज रूटीन महिलाओं की प्रतिनिधित्व क्षमता को सीमित करती हैं और उनकी मौजूदगी को ऑन-स्क्रीन काफी हद तक रोकती हैं.

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