Advertisement
trendingNow,recommendedStories0/zeesalaam/zeesalaam2903898
Zee SalaamMuslim Worldबलूचिस्तान में मानवाधिकारों का कत्ल, पाक सेना की काली करतूत का हुआ बड़ा खुलासा

बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का कत्ल, पाक सेना की काली करतूत का हुआ बड़ा खुलासा

Balochistan News: पाकिस्तानी सेना पर बलूचिस्तान और अन्य प्रांतों में मानवाधिकार उल्लंघन, जबरन गुमशुदगी, फर्जी एनकाउंटर और यातना जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. 

बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का कत्ल, पाक सेना की काली करतूत का हुआ बड़ा खुलासा

Balochistan News: पाकिस्तान में सेना और सुरक्षा एजेंसियों पर मानवाधिकार उल्लंघन के इल्जाम लगते रहे हैं. एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सेना और सुरक्षा बलों को कठघरे में खड़ा किया गया है. दुनिया भर की मानवाधिकार संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों ने लगातार इस बात पर चिंता जताई है कि पाकिस्तान की सेना जबरन गुमशुदगियों, गैर-न्यायिक हत्याओं और यातनाओं जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त है. यह हालात खासकर बलूचिस्तान, सिंध, पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांतों में और भी गंभीर है.

पाकिस्तान की ‘डिफेंस ऑफ ह्यूमन राइट्स’ संस्था ने 2024 में 2,300 से ज्यादा जबरन गुमशुदगी के मामले दर्ज किए. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि यह आंकड़ा पिछले सालों की तुलना में 27 फीसद बढ़ा है. इसका मतलब है कि सेना और खुफिया एजेंसियां बिना कानूनी प्रक्रिया के नागरिकों को उठाकर गायब कर रही हैं. इनमें राजनीतिक कार्यकर्ता, पत्रकार, छात्र और यहां तक कि आम नागरिक भी शामिल हैं.

बलूचिस्तान पर सबसे ज्यादा असर
बलूचिस्तान लंबे वक्त से पाकिस्तानी आर्मी की कठोर कार्रवाइयों का शिकार रहा है. यहां से बार-बार ऐसी खबरें आती हैं कि लोगों को उनके घरों और शैक्षणिक संस्थानों से उठाकर गुप्त यातना शिविरों में रखा जाता है. बलूच नेशनल मूवमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ फरवरी 2024 में ही 28 लोगों को यातना दी गई, 5 लोगों की गैर-न्यायिक हत्या हुई और 33 लोग गायब कर दिए गए.

Add Zee News as a Preferred Source

महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार
रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि हिरासत में ली गई महिलाओं के साथ यौन हिंसा और उत्पीड़न आम बात है. अहमदिया और ईसाई समुदाय जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों को निशाना बनाया जाता है. वहीं, पाकिस्तान के विवादित ‘धर्म-निंदा कानून’ का इस्तेमाल अक्सर निर्दोष नागरिकों के खिलाफ किया जाता है, जिसमें सेना और पुलिस की भूमिका भी सामने आई है.

सैन्य अदालतों की भूमिका
सबसे बड़ी चिंता यह है कि पाकिस्तान की सैन्य अदालतें अब आम नागरिकों पर भी मुकदमे चलाने लगी हैं. मई 2023 के विरोध प्रदर्शनों में गिरफ्तार 105 लोगों में से 85 को गुप्त मुकदमों के बाद 2 से 10 साल की सजा सुनाई गई. यह पूरी प्रक्रिया न तो पारदर्शी थी और न ही अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मानकों पर खरी उतरती है.

TAGS

Trending news