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Balochistan News Today: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से जबरन गायब किए जाने का एक और मामला सामने आया है. एक मानवाधिकार संगठन ने दावा किया है कि एक ही परिवार के कम से कम चार लोगों को पाकिस्तानी अधिकारियों ने कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया है. यह जानकारी सोमवार (15 दिसंबर) को सामने आई. जिसने दुनियाभर का ध्यान अपनी तरफ खींचा है.
मानवाधिकार संस्था बलूच यकजहती कमेटी (BYC) के मुताबिक, शनिवार (13 दिसंबर) को क्वेटा में एक इनडोर स्थल पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर एक जागरूकता संगोष्ठी आयोजित की गई थी. संगठन का कहना है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण था, इस दौरान न तो किसी सड़क को रोका गया और न ही राज्य के किसी कामकाज में कोई बाधा डाली गई.
BYC का आरोप है कि इसके बावजूद, संगोष्ठी में कथित भागीदारी के संदेह में एक बलूच परिवार के चार सदस्यों को शनिवार रात क्वेटा के सरियाब थाने बुलाया गया. इसके बाद से वे सभी कथित तौर पर लापता हैं. संगठन का कहना है कि इन लोगों को थाने बुलाने के बाद जबरन गायब कर दिया गया.
BYC के मुताबिक, जब इतवार (14 दिसंबर) सुबह इन चारों की बरामदगी के लिए अदालत में याचिका दायर की गई, तो पाकिस्तानी अधिकारी उन्हें न्यायाधीश के सामने पेश नहीं कर सके. अदालत को यह जानकारी दी गई कि चारों लोगों को क्वेटा के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (MPO) कानून के तहत हिरासत में रखा गया है. यह कानून सरकार को “सार्वजनिक व्यवस्था के संभावित खतरे” के आधार पर किसी को निवारक हिरासत में रखने की इजाजत देता है.
मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि हिरासत को सही ठहराने से जुड़े कोई भी कानूनी दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किए गए. BYC का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में कानूनी औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया. इस घटना की निंदा करते हुए बलूच यकजहती कमेटी ने कहा कि यह हालात बलूचिस्तान में प्रभावी रूप से एक 'अघोषित सैन्य मार्शल लॉ' की ओर इशारा करती है.
संगठन का आरोप है कि वहां न्यायाधीशों से लेकर डिप्टी कमिश्नरों तक, सभी पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. BYC ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर किसी कार्यक्रम का आयोजन करना एक मौलिक मानव और संवैधानिक अधिकार है.
BYC के मुताबिक, सिर्फ इसी आधार पर एक ही परिवार के चार लोगों को कथित तौर पर जबरन गायब करना और बिना किसी कानूनी आधार के एमपीओ कानून के तहत हिरासत में रखना, बलूचिस्तान में अपनाए जा रहे प्रशासनिक रवैये को दिखाता है. मानवाधिकार संस्था ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे इस कथित राज्य दमन के खिलाफ प्रभावी और व्यावहारिक कदम उठाएं. संगठन का कहना है कि मौजूदा हालात में चुप्पी साधे रखना, पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न को और मजबूती देने जैसा होगा.