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India in UN: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को एक बार फिर कठघरे में खड़ा किया है. भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि अब यह साफ हो चुका है कि पाकिस्तान वैश्विक आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला 'दुष्ट राष्ट्र' है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
योजना पटेल ने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उनका देश दशकों से आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता देता रहा है. उन्होंने ब्रिटिश मीडिया चैनल 'स्काई न्यूज' के साथ हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक इंटरव्यू का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह का कबूलनामा अब किसी को चौंकाता नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान की यह भूमिका पहले से ही जगजाहिर रही है.
दरअसल, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने इंटरव्यू में माना कि पाकिस्तान ने करीब तीन दशकों तक अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए आतंकवाद से जुड़ा 'गंदा काम' किया है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर पाकिस्तान सोवियत संघ के खिलाफ युद्ध और 9-11 के बाद की लड़ाई में शामिल नहीं होता, तो उसका ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर और बेदाग होता.
भारत की प्रतिक्रिया पाकिस्तान मिशन के काउंसलर जावेद अजमल के उस बयान के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने भारत पर अप्रत्यक्ष रुप से आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. अजमल ने बलूच लिबरेशन आर्मी के जरिये ट्रेन पर किए गए हमले में भारत का हाथ होने का इशारा किया, हालांकि उन्होंने सीधे भारत का नाम नहीं लिया. इससे पहले पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता भी भारत पर इसी तरह के आरोप लगा चुके हैं.
इसके अलावा अजमल ने हाल ही में भारत के जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर भी चिंता जताई और पीड़ितों के प्रति हमदर्दी का इजार किया, लेकिन इस दौरान उन्होंने कश्मीर को 'भारत के जरिये अवैध रूप से कब्जा किया गया क्षेत्र' कहने से भी परहेज नहीं किया. पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन 'द रेसिस्टेंट फ्रंड' ने ली थी, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी.
योजना पटेल ने आतंकवाद से पीड़ितों के समर्थन के लिए संयुक्त राष्ट्र के जरिये शुरू किए गए VOTAN नेटवर्क के शुभारंभ के मौके पर कहा कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है, ऐसे में वह इस दर्द को गहराई से समझता है. उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के बाद आलमी बिरादरी से मिले समर्थन और एकजुटता ने साबित कर दिया कि आतंकवाद के प्रति अब दुनिया की सहिष्णुता बिल्कुल भी नहीं बची है.