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Balochistan News Today: खुद को लोकतांत्रिक देश कहने वाले पाकिस्तान में लगातार आजाद आवाजों का दमन किया जा रहा है. ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां अब 'आतंकवाद' से ज्यादा छात्रों, शिक्षकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से डरती नजर आ रही हैं. जो पाकिस्तानी फौज के जुल्म के खिलाफ आवाज उठाता है, वो गायब हो जाता है और जवाब देने के नाम पर सिर्फ चुप्पी मिलती है.
दरअसल, पाकिस्तान में जबरन गुमशुदगी की घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं और अब इसका शिकार बने हैं दो बलूच विद्वान. जिनकी पहचान असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उस्मान काजी और उनके छोटे भाई जिब्रान अहमद के रुप में हुई. बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) के मुताबिक, 12 अगस्त की सुबह क्वेटा स्थित उनके घर पर आतंकवाद विरोधी विभाग ने छापा मारा और दोनों भाइयों को उठा ले गए. तब से न तो उनका कोई पता है और न ही सरकार या जिम्मेदारों की तरफ को ऑफिशियल जानकारी दी गई है.
डॉ. उस्मान काजी एक प्रतिष्ठित शिक्षक और BUITEMS यूनिवर्सिटी में पीएचडी धारक हैं, जबकि उनके भाई जिब्रान इकोनॉमिक्स में एमफिल कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि दोनों लोग न ही किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल थे और न ही किसी अपराध में शामिल थे. इसके बावजूद उन्हें उठा लेना पाकिस्तान में बढ़ती राज्य प्रायोजित दहशतगर्दी का प्रमाण है.
मानवाधिकार संगठनों ने क्या कहा?
BVJ और बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग पांक (Paank) ने इस कार्रवाई कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि जबरन गुमशुदगी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक अपराध है और यह किसी शख्स की आजादी, सुरक्षा और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है.
उधर ब्रिटेन के पीटरबरो पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिए गए बलूच कार्यकर्ता शबर जमालदिनी की रिहाई की भी मांग तेज हो गई है. पांक ने चेतावनी दी है कि अगर शबर को पाकिस्तान भेजा गया तो उनकी जान को गंभीर खतरा होगा, क्योंकि वहां बलूच कार्यकर्ताओं को अक्सर गायब कर दिया जाता है या बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के मार दिया जाता है.
इसी बीच कराची प्रेस क्लब के बाहर एक बलूच परिवार लगातार 10वें दिन विरोध प्रदर्शन कर रहा है. कराची यूनिवर्सिटी के छात्र जाहिद अली को 17 जुलाई को पाकिस्तानी सेना के जरिये जबरन उठा लिया गया था. उनका परिवार, खासकर उनके बीमार पिता, 29 दिनों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से चुप है.
बलूच याकजेहती कमेटी (BYC) ने छात्रों, पत्रकारों और आम नागरिकों से इस आंदोलन में साथ आने की अपील की है, ताकि आवाजें दबाई न जा सकें और जाहिद जैसे नौजवानों को सुरक्षित वापस लाया जा सके.
बता दें, बलूचिस्तान में संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हुए लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. अब तक कितने लोग गायब हुए हैं, इसका सटीक आंकड़ा बताना मुश्किल है. इसकी वजह है, सीमित मीडिया पहुंच और मोबाइल नेटवर्क बंद होने की वजह से स्थिति साफ नहीं है. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 20 साल में 500 से ज्यादा लोगों को जबरन गायब किया गया है, जबकि कुछ दावे 20,000 तक की संख्या बताते हैं.
पाकिस्तान कमीशन ऑफ इंक्वायरी ऑन एनफोर्स्ड डिसअपीयरेंस के मुताबिक, जून 2024 तक 10,285 मामले दर्ज हुए थे, जिनमें से करीब 8,000 का निपटारा किया गया. मानवाधिकार संगठन इन घटनाओं के पीछे पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों का हाथ बताते हैं, लेकिन पाकिस्तीन फौज और सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है.