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Pakistan News Today: पाकिस्तान के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान में पोलियो को पूरी तरह से खत्म करने के लिए रीजनल लैबोरेट्री ने देश भर के 18 जिलों के सीवेज नमूनों में वाइल्ड पोलियोवायरस टाइप 1 का पता चलने की तस्दीक की है. पोलियो के यह मामले पाकिस्तान के अलग-अलग जिलों से सामने आए हैं.
पोलियो के लिए राष्ट्रीय आपातकालीन संचालन केंद्र ने 21 फरवरी से 6 मार्च के बीच इकट्ठा किए गए एनवॉयरमेंटल सैंपल की जांच के बाद इसकी तस्दीक की है. यह नमूने पाकिस्तान के चार प्रांत के अलग-अलग सीवेज लाइनों से इकट्ठा किए गए थे. सभी प्रांतों में सिंध में सबसे ज्यादा इसका असर देखा गया. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सिंध 12 जिले प्रभावित हैं. इसी तरह पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा के दो-दो जिले, बलूचिस्तान का एक जिला और इस्लामाबाद भी शामिल है.
पोलियो के मामले मिलने से पाकिस्तान स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं. पाकिस्तान में खास तौर पर इस्लामाबाद, बलूचिस्तान के चमन और दक्षिणी वजीरिस्तान के डीर में पोलियो के लक्षण मिले हैं. इसके अलावा पंजाब प्रांत के लाहौर और डेरा गाजी खान जिलों में भी सीवेज से पोलियो के संकेत मिले हैं. इसी तरह सिंध के बादिन दादू, हैदराबाद, जकोबाबाद, शहीद बेनज़ीराबाद, सुजावल, कंबार, सुक्कुर और कराची के ईस्ट, वेस्ट, सेंट्रल और केमरी जिलों में भी वायरस पाया गया है.
हालांकि, अधिकांश जिलों में वायरस मिलने के बावजूद एक सकारात्मक बात सामने आई है, वो यह कि चार इलाकों में वायरस के कोई लक्षण नहीं मिले हैं. पाकिस्तान ने पहले ही इस साल पोलियो के 6 मामलों की पुष्टि करते हुए उनकी रिपोर्ट पेश कर चुका है. इसमें से चार मामले सिंध में एक- एक मामले खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब में मिले हैं. बीते साल 2024 में देश में पोलियो के 74 मामले पाए गए थे. जिसमें मुख्य रुप से बलोचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में पाए गए थे.
पोलियो को लेकर कई तरह की भ्रांतियां है. पोलियो से ग्रसित व्यक्ति विकलांग हो जाता है, इसका कोई इलाज नहीं है. पोलियो की रोकथाम टीकाकरण (Vaccination) सबसे महत्वपूर्ण है. ओरल पोलियो वैक्सीन बच्चों को इस खतरनाक बीमारी से बचाने के लिए सबसे कारगर हथियार है. भारत की तर्ज पर पाकिस्तान में भी पोलियो को जड़ से खत्म करने लिए बच्चों को पर फोकस करना है और यह सुनिश्चित करना होगा उन्हें इसकी खुराक मिले. पोलियो वैक्सीन की सही खुराक मिलने से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी.
पोलियो से बचाव के लिए बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन की कई खुराक देना बेहद जरूरी है. यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पांच साल से छोटे सभी बच्चों को पोलियो की नियमित टीका मिले, जिससे इस जानलेवा बीमारी से लड़ने के लिए इम्यूनिटी मिल सके.