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दुनिया के 500 सबसे असरदार मुसलमानों में 16वें नम्बर पर भारत के महमूद मदनी; तारिक जमील को भी जगह

Maulana Tariq Jamil in Most Influential Muslims List: पाकिस्तान के मशहूर आलिमेदीन मौलाना तारिक जमील ने अपने बयान, सादगी और इंसानी खिदमत से साबित किया कि मुश्किल दौर में भी अमन, मोहब्बत और ईमान की आवाज़ दुनिया को जोड़ सकती है. यही वजह है कि अम्मान स्थित द रॉयल इस्लामिक स्ट्रैटेजिक स्टडीज सेंटर ने उन्हें Most Influential Muslims की लिस्ट में शामिल किया है. 

 

मौलाना तारिक जमील और मौलाना महमूद मदनी (दाएं) (फाइल फोटो)
मौलाना तारिक जमील और मौलाना महमूद मदनी (दाएं) (फाइल फोटो)

Most Influential Muslims: हालिया कुछ सालों में दुनियाभर में इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ प्रोपैगेंडा खड़ा किया जा रहा है. इसकी वजह से मुसलमानों के साथ हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं. इस मुश्किल वक्त में भी कई ऐसे मुस्लिम आलिमेदीन हैं, जो लगातार इंसानियत और मजहबी कामों को करने में जुट रहते हैं. उन्हीं में से एक हैं भारत के मशहूर आलिमेदीन और जमीयत उलेमा-ए-हिंद (JUH) के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी और पाकिस्तान के मशहूर आलिमेदीन मौलाना तारिक जमील.

मौलाना महमूद मदनी और मौलाना तारिक जमील सिर्फ भारत में ही नहीं में बल्कि पाकिस्तान समेत दुनिया के कई मुल्कों में मशहूर हैं और उनकी बातों को संजदीगी से सुना जाता है. इस बीच दुनियाभर में इस्लामी तालीम, इंसानी खिदमत और अमन-चैन का पैगाम देने वाले मौलाना महमूद मदनी और मौलाना तारिक जमील को दुनिया के सबसे प्रभावशाली 50 मुस्लिम शख्सियतों की लिस्ट में शामिल किया गया है.

मौलाना तारिक जमीन के बयानों की वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं. मौलाना तारिक जमील ने एकता, मोहब्बत, आपसी भाईचारा, रहम और ईमान पर आधारित संदेश ने पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों को प्रभावित किया है, जिसकी वजह से वह मौजूदा दौर की सबसे सम्मानित मुस्लिम हस्तियों में गिने जाते हैं.

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The Muslim 500 क्यों है खास?

बता दें, The Muslim 500: The World’s 500 Most Influential Muslims 2025 की नामवर लिस्ट में सिर्फ इस्लामी जगत के मशहूर हस्तियों को जगह दी जाती है. यह लिस्ट हर साल जॉर्डन की राजधानी अम्मान स्थित द रॉयल इस्लामिक स्ट्रैटेजिक स्टडीज सेंटर के जरिये जारी की जाती है. इसमें मजहब, सियासत, तालीम, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान देने वाली प्रमुख शख्सियतों को जगह मिलती है, जिन्होंने समाज को प्रभावित किया और दुनिया के लोगों को जिंदगी को बेहतर बनाने अहम किरदार अदा किया है. इसकी शुरूआत साल 2029 में की गई थी.

2025 की लिस्ट में तारिक जमील कई मशहूर उलेमा को जगह मिली है. द रॉयल इस्लामिक स्ट्रैटेजिक स्टडीज सेंटर के जरिये जारी रैंकिंग के मुताबिक, मौलाना महमूद मदनी को 16वां स्थान मिला है. इसी तरह पाकिस्तान के मुफ्ती तकी उस्मानी को दूसरा स्थान मिला, जबकि मौलाना तारिक जमील 32वें नंबर पर रहे. इसके अलावा मौलाना नजर-उर-रहमान ने 41वां और शेख मोहम्मद इलियास अत्तर कादरी ने 44वां स्थान हासिल किया. 

कौन हैं मौलाना महमूद मदनी?

मौलाना महमूद मदनी भारत के प्रमुख इस्लामिक विद्वान और मुस्लिम प्रतिनिधि संगठनों के बड़े नेता हैं. उनका जन्म 3 मार्च 1964 को उत्तर प्रदेश के देवबंद में हुआ. वह जमीयत उलेमा-ए-हिंद (महमूद मदनी गुट) के अध्यक्ष हैं, जो भारत के सबसे पुराने और प्रभावी मुस्लिम संगठनों में से एक हैं. मौलाना मदनी प्रसिद्ध दारुल उलूम देवबंद के कदीम शिक्षण परिवार से आते हैं.

मौलाना महमूद मदनी के पिता मौलाना असअद मदनी और चाचा मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी इस्लामी विद्वता और आजादी के आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे हैं. महमूद मदनी 2006 से 2018 तक राज्यसभा सांसद भी रहे, जहां उन्होंने अल्पसंख्यक अधिकार, शिक्षा, सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को उठाया.वह अंतर-धार्मिक संवाद, सामाजिक एकता और संवैधानिक मूल्यों के समर्थन के लिए जाने जाते हैं और कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

कौन हैं मौलाना तारिक जमील?

मौलाना तारिक जमील, पाकिस्तान के मशहूर इस्लामी स्कॉलर, दाई और मोटिवेशनल स्पीकर हैं. उनके बयानों की गूंज सरहदों से परे पूरी दुनिया में सुनाई देती है. 1 अक्टूबर 1953 को पंजाब के तुलम्बा में जन्मे मौलाना तारिक जमील देवबंदी विचारधारा से ताल्लुक रखते हैं. हदीस, तफसीर और तसव्वुफ़ जैसे इस्लामी विषयों पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है. उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे जटिल धार्मिक बातों को भी बेहद सरल और दिल में उतर जाने वाले अंदाज में आम लोगों तक पहुंचाते हैं.

मौलाना जमील 'मदरसा अरबिया रौजतुल अतफाल' के संस्थापक हैं और तंजीमुल मदारिस पाकिस्तान से भी जुड़े रहे हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर उनके बयानों को करोड़ों बार देखा जा चुका है, जबकि इंस्टाग्राम और फेसबुक पर भी उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है. दुनियाभर में उनके चाहने वाले खुद को 'Tariq Jameel Lovers' के नाम से पहचान देते हैं.

साल 2020 में अपने बेटे यूसुफ जमील की मौत हो गई थी. इस सदम और जेहनी दर्द के बावजूद, मौलाना ने जिस तरह सब्र और अल्लाह की रजा को अपनाने की बात कही, उसने लाखों लोगों को भावनात्मक और आध्यात्मिक तौर पर मजबूती मिली. मौजूदा समय में मौलाना तारिक जमील के बयानों का असर न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि भारत, बांग्लादेश, यूरोप, यूके और मिडिल ईस्ट तक फैला हुआ है, जहां उनके संदेश को इंसानियत, सुधार और रूहानी मार्गदर्शन के तौर पर सुना और अपनाया जाता है.

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