Pakistan News: पाकिस्तान के लाहौर यूनिवर्सिटी में संस्कृत को एक भाषा के तौर पर पढ़ाने का फैसला लिया गया है. बाकायदा इसके आधिकारिक तौर पर चार कोर्स भी बनाए गए हैं. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.
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Pakistan News: पाकिस्तान में बंटवारे के बाद पहली बार किसी विश्वविद्यालय में संस्कृत की वापसी हुई है. लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज ने संस्कृत का एक नया कोर्स शुरू किया है. ये पहल 3 महीने की वीकेंड वर्कशॉप के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन अप्रत्याशित रूप से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद इसे एक पूर्ण चार-क्रेडिट यूनिवर्सिटी कोर्स में बदल दिया गया.
प्रोफेसरों का कहना है कि भाषाओं को सीमाओं की दीवार नहीं, बल्कि संस्कृतियों को जोड़ने वाले पुल के रूप में देखा जाना चाहिए. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के लाहौर यूनिवर्सिटी में संस्कृत की पढ़ाने की शुरुआत के बाद महाभारत और गीता भी पढ़ाए जाएंगे. गुरमानी सेंटर के डायरेक्टर डॉ. अली उस्मान का मानना है कि अगले 10 से 15 वर्षों के अंदर ऐसा बदलाव आएगा कि पाकिस्तान के अंदर पैदा हुए और पले-बढ़े बच्चे गीता और महाभारत के विद्वान देखने को मिलेंगे.
इस पूरी कोशिश के पीछे सबसे ज्यादा फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज के समाजशास्त्र प्रोफेसर डॉ. शाहिद रशीद का हाथ है. डॉ. शाहिद को संस्कृत में बहुत पहले से रुचि थी. अरबी और फारसी सीखने के बाद उन्होंने संस्कृत पढ़ना शुरू किया और फिर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए कैम्ब्रिज की एंटोनिया रप्पेल और ऑस्ट्रेलियन इंडोलॉजिस्ट मैककॉमस टेलर से सीखा. पाकिस्तान में संस्कृत भाषा को दक्षिण एशियाई सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत से जोड़ने की दिशा में यह कदम माना जा रहा है
गौरतलब है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ अत्याचार होते हैं. इन सब के बीच पाकिस्तान में संस्कृत को पढ़ाने की इजाजत देना एक प्रोग्रेसिव फैसला है. किसी भी देश में सभी धर्मों से जुड़ी संस्कृति को जगह देना उनसे जुड़े प्रतिकों और भाषाओं इत्यादी का संरक्षण करना उस देश की समावेशिता को दर्शाता है. पाकिस्तान 1947 से पहले भारत का ही हिस्सा था, बटवारे के बाद दोनों देशों के बीच एक सीमा रेखा खींच दी गई लेकिन भाषा, संस्कृति और खान-पान इत्यादि में सीमा रेखा खींचना बेहद मुश्किल है. संस्कृत भाषा भी भारत-पाकिस्तान का साझा विरासत है.