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Pakistan Terrorist News Today: पाकिस्तान में इन दिनों कई चरमपरंथी संगठन पनप रहे हैं, जो ना सिर्फ पाकिस्तान बल्कि पूरी इंसानियत के लिए खतरा बनकर उभर रहे हैं. पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार (23 अक्टूबर) को आतंकी संगठन तेहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) पर बैन लगा दिया है. यह फैसला हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद लिया गया, जिनमें एक पुलिसकर्मी और चार नागरिकों की मौत हो गई थी. पंजाब प्रांतीय सरकार की सिफारिश पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की कैबिनेट ने इसको मंजूरी दी.
मिली जानकारी के मुताबिक,यह हिंसा करीब एक हफ्ते पहले तब शुरू हुई थी जब लाहौर के बाहरी इलाके में TLP समर्थकों की हजारों की भीड़ पुलिस से भिड़ गई थी. प्रदर्शनकारी राजधानी इस्लामाबाद की ओर मार्च कर रहे थे ताकि वहां फिलिस्तीन के समर्थन में रैली आयोजित की जा सके. इस दौरान हुई झड़पों में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी और कई प्रदर्शनकारी घायल हुए थे.
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कैबिनेट ने देश के आतंकवाद-रोधी कानून के तहत इस चरमपंथी पार्टी को प्रतिबंधित करने पर रजामंदी जताई है. सरकार ने TLP पर हिंसक और उग्रवादी सरगर्मियों में शामिल होने का आरोप लगाया है. यह दूसरी बार है जब TLP पर पाकिस्तान में बैन लगाया गया है.
इससे पहले 2020 में भी पार्टी को प्रतिबंधित किया गया था, जब फ्रांस में इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कार्टून प्रकाशित होने के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए थे. उस वक्त TLP ने फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित करने की मांग की थी. हालांकि, 2021 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार ने संगठन से समझौता कर लिया और उस पर लगा प्रतिबंध हटा दिया था. इस कदम की कई सियास दलों ने आलोचना की थी, क्योंकि इससे TLP को फिर से सक्रिय होने का मौका मिल गया था.
हालिया हिंसा के बाद सरकार ने एक बार फिर संगठन पर सख्ती दिखाई है. पिछले हफ्ते लाहौर के पास पुलिस ने TLP के 'लॉन्ग मार्च' को तितर-बितर कर दिया था. अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस अब संगठन के प्रमुख साद रिजवी की तलाश कर रही है, जो 13 अक्टूबर को हुई झड़पों के बाद से फरार हैं. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी 10 अक्टूबर से ही अमेरिकी दूतावास के बाहर फिलिस्तीन के समर्थन में रैली निकालने पर अड़े हुए थे.
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैटन, पत्थरों और बंदूकों से पुलिस पर हमला किया. पंजाब सरकार की प्रवक्ता उजमा बुखारी ने बताया कि प्रांतीय सरकार ने केंद्र को TLP पर बैन लगाने की सिफारिश भेजी थी. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने पहले ही संगठन के सभी दफ्तर बंद करा दिए हैं.
गौरतलब है कि तेहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान ने पाकिस्तान की सियासत में 2018 के आम चुनावों के दौरान खूब सुर्खियां बटोरी थीं. पार्टी ने उस समय सिर्फ एक मुद्दे पर प्रचार किया था. देश के धर्म-निंदा कानून (ब्लासफेमी लॉ) की रक्षा. यह वही कानून है जिसमें इस्लाम का अपमान करने पर मौत की सजा का प्रावधान है. पहले भी TLP कुरान की बेअदबी जैसे मुद्दों पर विदेशों में हुए मामलों के विरोध में हिंसक प्रदर्शन कर चुकी है.