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Bangladesh News: जुलाई चार्टर को नेशनल रिफॉर्म के तौर पर पेश करने की मजम्मत करते हुए बांग्लादेश की अवामी लीग पार्टी ने इसे एक "सोचा-समझा धोखा" बताया है,जिसका मकसद अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस को बचाना है. पार्टी ने दावा किया कि जुलाई चार्टर सुधार नहीं बल्कि गहरी दूरी लाता है, जिसका एक अकेला मकसद यूनुस को बचाना, अथॉरिटी दिखाना और दुनिया को बदलाव का भ्रम में बेचना है.
अवामी लीग ने कहा, "जुलाई चार्टर कभी भी बांग्लादेश के बारे में नहीं था.यह मुहम्मद यूनुस के बचने के बारे में था. अपनी नाकामियों और देश में बढ़ती आलोचना को लेकर बढ़ती जांच से घिरे यूनुस ने चार्टर को एक स्मोक स्क्रीन की तरह बनाया.
अपनी कहानी को फिर से लिखने और जवाबदेही से बचने का एक तरीक. हर क्लॉज, हर पॉलिश्ड पैराग्राफ, हर विदेशी-मंज़ूर मंज़ूरी को ध्यान से इस तरह डिज़ाइन किया गया था, कि वह रिफॉर्म का भ्रम दिखाते हुए ज़िम्मेदारी से बच सकें. इसमें आगे कहा गया "यूनुस ने दुनिया को 'नेशनल रिन्यूअल' की कहानी बेची, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा खराब है. बंद दरवाजों के पीछे, चार्टर एक मतलबी प्लान था, कोई नेशनल ब्लूप्रिंट नहीं. एलीट और NGO के लोगों को चुनकर, उन्होंने यह पक्का किया कि असली अथॉरिटी या आज़ाद फ़ैसले वाले लोग उन्हें चुनौती न दे सकें.
वामी लीग के मुताबिक, विरोधी आवाज़ों को दबा दिया गया, अलग राय रखने वालों को बाहर रखा गया, और बांग्लादेश के ज़्यादातर नागरिकों को नज़रअंदाज़ किया गया. पार्टी ने ज़ोर देकर कहा कि 17 अक्टूबर को चार्टर पर साइन करने का प्रोग्राम, जिसे नेशनल रिफ़ॉर्म बताया गया, असल में देश के बिना एक सभा थी. इसमें कहा गया कि बांग्लादेश की ज़्यादातर बड़ी पॉलिटिकल पार्टियों ने इस इवेंट में शामिल होने से मना कर दिया. यह जानबूझकर किया गया अपमान था. जिससे चार्टर की खोखली लेजिटिमेसी सामने आ गई.
यहां तक कि नेशनल सिटिज़न पार्टी, जिसे लंबे वक्त से तथाकथित “किंग्स पार्टी” कहा जाता था, भी दूर रही और असली पावर सेंटर्स के न होने पर, पार्टी ने ज़ोर देकर कहा कि लोगों को रिप्रेज़ेंट करने का डॉक्यूमेंट का दावा एक "गढ़ा हुआ झूठ" था.
अवामी लीग का बड़ा सवाल
“जुलाई चार्टर ने इस बिना चुने हुए अमीर लोगों की असली सोच को सामने ला दिया. यह मानना कि डेमोक्रेसी का नाटक किया जा सकता है, रिप्रेजेंटेशन को नकली बनाया जा सकता है, और बंद दरवाजों के पीछे पावर के लिए मोलभाव किया जा सकता है. अगर यूनुस एक बार देश की मेजोरिटी को बायपास कर सकते थे, तो जब दांव ऊंचे होंगे तो उन्हें दोबारा ऐसा करने से कौन रोकेगा.
इसी ग्रुप की लीडरशिप में नेशनल इलेक्शन डेमोक्रेसी की कोई एक्सरसाइज नहीं होगी. यह धोखे का ही एक्सटेंशन होगा. वही एक्टर्स, वही प्लेबुक, वही नतीजा—बांग्लादेश के लोग बिना आवाज़ के रह गए जबकि दुनिया एक और ध्यान से लिखी गई स्क्रिप्ट की तारीफ कर रही है.