)
Sudan News: सूडान सरकार ने बुधवार, 29 अक्टूबर को कहा कि पश्चिमी सूडान के एल-फाशेर शहर में अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़ (RSF) के जरिए किए गए हमलों में अब तक 2,000 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है. सरकार का कहना है कि यह नरसंहार निर्दोष और निहत्थे लोगों के खिलाफ किया गया है.
पोर्ट सूडान में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मानवीय सहायता की उप आयुक्त मोना नूर अल-दाइम ने इस घटना की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि आरएसएफ ने अस्पतालों में मरीजों और घायलों को गोली मार दी और भाग रहे नागरिकों का पीछा कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया. कई पीड़ितों के साथ यौन हिंसा भी की गई.
इसी बीच, स्वयंसेवी संगठन सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने बताया कि पिछले तीन दिनों में ही आरएसएफ के हमलों में करीब 1,500 नागरिक मारे गए हैं. इस तरह मई 2024 से आरएसएफ की घेराबंदी शुरू होने के बाद से अब तक एल-फाशेर में कुल 14,000 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं.
संगठन ने अपने बयान में कहा कि ये हत्याएं एक सुनियोजित अभियान का हिस्सा हैं, जिसमें लगातार गोलाबारी, भूख से मरने की साजिश और फांसी जैसी घटनाएं शामिल हैं. इसके तहत अस्पतालों, बाजारों और विस्थापन शिविरों को जानबूझकर निशाना बनाया गया है.
वहीं दूसरी ओर, सूडान फाउंडिंग अलायंस, जिसमें आरएसएफ, कई सशस्त्र संगठन, राजनीतिक दल और नागरिक समूह शामिल हैं ने नागरिकों पर किसी भी प्रकार की हिंसा के आरोपों से इनकार किया है. इस गठबंधन ने कहा कि 26 अक्टूबर को आरएसएफ ने एल-फाशेर शहर पर नियंत्रण हासिल कर लिया है.
इसके बाद, सूडानी सशस्त्र बलों के कमांडर अब्देल फतह अल-बुरहान ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि एसएएफ ने सैन्य कारणों से शहर से अस्थायी रूप से पीछे हटने का फैसला किया है, लेकिन जल्द ही शहर को फिर से अपने कब्जे में लेने की कसम खाई है.
गौरतलब है कि एसएएफ और आरएसएफ के बीच चल रहा संघर्ष अब अपने तीसरे साल में एंटर कर चुका है, जिसने अब तक कई हजार लोगों की जान ले ली है, लाखों लोगों को विस्थापित कर दिया है और देश को भुखमरी के कगार पर पहुंचा दिया है.