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Afghanistan News Today: अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने सत्ता में लौटने के बाद कई बड़े कदम उठाए हैं, तो दूसरी तरफ उस पर कई विवादित फैसले करने के भी आरोप लगते रहे हैं. वहीं, अब तालिबान सरकार ने इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगाकर बड़ा विवाद शुरू कर दिया है. इससे पहले नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पाबंदी के बाद भारी विरोध देखने को मिला था.
तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदजादा के आदेश पर कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगा दी गई है. तालिबान का दावा है कि यह कदम 'बुराई को खत्म करने' के लिए उठाया गया है, लेकिन इसकी वजह से आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है.
मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत में फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. पिछले तीन हफ्तों से कई इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पूरी तरह से बंद है. तालिबान अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान तालिबान प्रमुख के आदेश पर चलाया जा रहा है. बल्ख प्रांत के सरकारी प्रवक्ता अताउल्लाह जईद ने मंगलवार को पुष्टि की कि तालिबान नेता के आदेश के तहत फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है.
तालिबान ने इस फैसले को 'बुराई रोकने की कोशिश' बताया है. तालिबान के प्रवक्ता का कहना है कि इंटरनेट की जगह देशभर में जल्द ही संपर्क के लिए वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराए जाएंगे. हालांकि, इस प्रतिबंध ने अफगान समाज की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं. इंटरनेट पर पाबंदी से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंटरनेट बंद होने से सरकारी ऑनलाइन सेवाएं, बैंकिंग सिस्टम और ऑनलाइन तालीम बुरी तरह से प्रभावित हुई है. इसके अलावा व्यापार और अन्य इंटरनेट-आधारित सेवाएं भी लगभग ठप हो गई हैं. लोगों का कहना है कि तालिबान के इस कदम से न सिर्फ व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं बल्कि नई पीढ़ी की पढ़ाई पर भी गंभीर असर पड़ रहा है.
गौरतलब है कि पिछले साल तालिबान सरकार ने नैतिक नियमों के तहत कई सख्त कानून लागू किए थे. एशियाई देशों को पक्षपात और हमेशा निशाने पर रखने वाले देशों ने तालिबान के इस फैसले पर नाराजगी जताई थी. तालिबान के फैसले के तहत औरतों के लिए चेहरा ढकना अनिवार्य कर दिया गया. इसी तरह से मर्दों के लिए दाढ़ी रखना और सार्वजनिक स्थलों पर संगीत बजाने पर पाबंदी जैसे आदेश शामिल थे.