UN on Israeli illegal settlements on Syrian Golan Heights: इजराइली अवैध कब्जे को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा का अहम फैसला आया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पेश कर साफ कर दिया है कि गोलान हाइट्स पर इजराइल का कब्जा अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है. आमराय यह है कि इजराइल को 1967 की सीमा पर लौटना चाहिए. इसका दुनियाभर के देशों ने समर्थन किया है और नेतन्याहू सरकार अपनी हठधर्मिता की वजह से अकला पड़ जा रहा है.
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Syrian Golan Heights: अमेरिकी और इजरायल की वजह से दशकों से मिडिल ईस्ट तनाव की आग में सुलगता रहा है. अमेरिका और ब्रिटेन के जरिये फिलिस्तीन की सरजमीं पर जबरन और अवैध तरीके से बसाया गया इजराइल ने बड़ी संख्या में बेगुनाह की हत्या की. इजराइल को लगातार यूरोपीय देशों और अमेरिका की मदद मिलती रही है. इजराइल ने वर्तमान में फिलिस्तीन, सीरिया, लेबनान समेत अपने पड़ोसी देशों की जमीनों पर अवैध ढंग से कब्जा करके कॉलोनियां बसा रहा है.
वहीं, मंगलवार (2 दिसंबर) को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) एक प्रस्ताव को मंजूर को कर इजराइल और अमेरिका को बड़ा झटका दिया है. इस प्रस्ताव में इजराइल के जरिये सीरियाई गोलान हाइट्स की पहाड़ियों पर किए गए कब्जे को छोड़ने को कहा गया है. साथ ही प्रस्ताव में यूनाइटेड नेशन ने यहूदी सरकार के गोलान हाइट्स को इजराइल में मिलाने के फैसले को गैरकानूनी करार दिया है.
प्रस्ताव में कहा गया है कि इजराइल को गोलान हाइट्स से 4 जून 1967 की रेखा तक वापस हट होगा. इजिप्ट (मिस्र) के जरिये तैयार किए गए इस मसौदा प्रस्ताव को मतदान के दौरान 123 देशों ने समर्थन दिया. इसके खिलाफ सिर्फ 7 वोट पड़े, जबकि 41 सदस्य देशों ने मतदान से दूरी बनाए रखी और वे अब्सटेन रहे. प्रस्ताव में कहा गया है कि इजराइली सरकार के जरिये 14 दिसंबर 1981 को लिया गया वह फैसला, जिसमें उसने कब्जे वाले सीरियाई गोलान क्षेत्र पर अपने कानून, अधिकार क्षेत्र और प्रशासन लागू करने की घोषणा की थी, वह शून्य और अमान्य है. उसकी कोई कानूनी वैधता नहीं है."
इसके साथ ही महासभा ने एक बार फिर मांग रखी है कि इजराइल तुरंत और पूरी तरह से कब्जे वाले पूरे सीरियाई गोलान हाइट से पीछे हटे और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों को लागू करे. यूएन के इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि सीरियाई गोलान पर इजराइल का लगातार कब्जा और इसे व्यवहार में अपने में मिलाने की नीति (de facto annexation) क्षेत्र में न्यायपूर्ण, व्यापक और टिकाऊ शांति स्थापित करने में बड़ी बाधा बनी हुई है.
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