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America News Today: अमेरिकी सरकार की हिंसक नीतियों ने दुनिया के कई देशों में तनाव पैदा कर दिया है. लोकतंत्र का ठेकेदार होने का दावा करने वाली अमेरिकी सरकार अपने खिलाफ होने वाली आलोचनाओं के दमन में जुटी रहती है. बीते दिनों अमेरिका की ट्रंप सरकार ने ब्रिटेन के पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सामी हमदी को हिरासत में ले लिया था. इसके बाद ट्रंप की दुनियाभर में किरकिरी होने लगी.
भारी विरोध के बाद अब अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग ने सामी हमदी को हिरासत से रिहा करने की तैयारी कर रहा है. उनके परिवार और नागरिक अधिकार संगठनों ने सोमवार (10 नवंबर) को पुष्टि की कि अमेरिकी सरकार के साथ हुए एक समझौते के तहत अब उन्हें अपने देश ब्रिटेन लौटने की इजाजत मिल गई है.
सामी हमदी को 26 अक्टूबर को सैन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया था. वह अमेरिका में एक स्पीच टूर के लिए गए हुए थे. गिरफ्तारी के बाद उन्हें दो हफ्ते से ज्यादा समय तक हिरासत में रखा गया.
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी वजहों के चलते उनका वीजा रद्द कर दिया था. विभाग ने बयान जारी कर कहा था कि "जो लोग आतंकवाद का समर्थन करते हैं और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करते हैं, उन्हें इस देश में काम करने या आने की इजाजत नहीं दी जाएगी."
सामी हमदी की अवैध गिरफ्तारी से रिहाई की खबर के बाद उनके परिवार का भी बयान सामने आया है. हमदी के परिवार ने बयान जारी कर कहा,"अल्हम्दुलिल्लाह, अच्छी खबर है. अमेरिकी सरकार ने सामी को रिहा करने पर सहमति जताई है. वह जल्द ही घर लौट पाएंगे, इंशाअल्लाह। बाकी जानकारी बाद में दी जाएगी."
कैलिफोर्निया स्थित संगठन काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR-CA), HMA लॉ फर्म और मुस्लिम लीगल फंड ऑफ अमेरिका (MLFA) ने बताया कि एक कानूनी समझौते के बाद यह रिहाई हो रही है, जिसके तहत हमदी की हिरासत खत्म कर दी गई है और उन्हें अपनी मर्जी से देश छोड़ने की इजाजत दी गई है।
CAIR-CA के मुताबिक, हमदी पर इमिग्रेशन से जुड़ा जो आरोप लगाया गया था, वह सिर्फ वीजा की अवधि खत्म होने (ओवरस्टे) का था, जो सरकार के जरिये वीजा बिना वजह और बिना पूर्व सूचना के रद्द किए जाने के बाद हुआ. संगठन ने यह भी साफ किया कि इस मामले में हमदी पर कोई आपराधिक आरोप नहीं लगाया था, न ही सुरक्षा से जुड़ा कोई खतरा पाया गया.
साथ ही अमेरिकी सरकार भी सामी हमदी को समुदाय या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं मानती. वहीं, नागरिक अधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि हमदी की गिरफ्तारी सियासी वजहों से की गई और यह ग़ज़ा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ उनकी खुली आलोचना की वजह से हुआ. जानकार इसके पीछे ट्रंप सरकार और उनके यहूदी समर्थकों के दबाव को हमदी पर कार्रवाई की वजह मानते हैं.
नागरिक अधिकार संगठनों का आरोप है कि सामी हमदी की गिरफ्तारी सियासी वजहों से हुई, क्योंकि वह ग़ज़ा में इजराइल की कार्रवाई की खुलकर आलोचना कर रहे थे।. हमदी लगातार इज़राइल की ग़ज़ा में जारी जंग को 'फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार और युद्ध अपराध' करार दे रहे हैं. वह पश्चिमी देशों की सरकारों पर भी इस संघर्ष में इजराइल का साथ देने का आरोप लगाते रहे हैं.
CAIR-CA के CEO हुसाम आयलूश ने कहा कि हमदी को हिरासत में रखना प्रेस की आजादी के लिए खतरनाक संकेत हैय उन्होंने कहा, "सामी को ICE की जेल में एक रात भी नहीं बितानी चाहिए थी. उनका असली 'गुनाह' सिर्फ इतना था कि उन्होंने फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजराइल के युद्ध अपराधों पर खुलकर बात की" उन्होंने यह भी कहा कि, "यह मामला दिखाता है कि जब कोई पत्रकार अमेरिका के बजाय इजराइल की आलोचना करता है, तो सरकार कितनी आसानी से संविधान के पहले संशोधन और प्रेस की आजादी को ताक पर रख देती है."
हमदी के वकीलों और नागरिक अधिकार संगठनों ने उनके समर्थन में फेडरल कोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका भी दायर की थी. इस याचिका में कहा गया था कि अचानक वीजा रद्द करना और हिरासत में लेना, अमेरिका के फ्री स्पीच और कानूनी प्रक्रिया के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है. सुनवाई के दौरान फेडरल जज ने सामी हमदी को कैलिफोर्निया से बाहर भेजने पर अस्थायी रोक भी लगा दी थी. अदालत ने कहा था कि हिरासत के खिलाफ राहत देने के लिए ठोस आधार मौजूद हैं.
CAIR-CA ने यह भी दावा किया कि हमदी अमेरिका में वैध वीजा पर आए थे, लेकिन इजराइल समर्थक और मुस्लिम विरोधी समूहों के दबाव के बाद उनका वीजा रद्द कर दिया गया. संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि DHS ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके हमदी को गलत तरीके से बदनाम किया, जो कि सरकारी शक्ति का अवैध और गैर-कानूनी हथियार हैं.
बता दें, सामी हमदी लंदन में रहते हैं और वह 'द इंटरनेशनल इंटरेस्ट' के एडिटर-इन-चीफ हैं, जो Global Politics और विदेशी मामलों पर आधारित एक प्रमुख मंच है. उनके समर्थकों का कहना है कि जरूरी सरकारी प्रक्रिया पूरी होते ही वह आने वाले दिनों में ब्रिटेन लौट जाएंगे.